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77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश और विदेश में रहने वाले सभी देशवासियों को संबोधित करते हुए गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने भारत की संवैधानिक परंपराओं, राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और समावेशी विकास की यात्रा को रेखांकित किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को संविधान के पूर्ण लागू होने के साथ भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बना। न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के आदर्श ही हमारे गणतंत्र की आत्मा हैं। उन्होंने संविधान निर्माताओं को नमन करते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद किया, जिनकी 150वीं जयंती देशभर में राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में मनाई गई।
राष्ट्र निर्माण में हर वर्ग की भूमिका को सराहा
राष्ट्रपति मुर्मू ने सशस्त्र बलों, पुलिस, अर्धसैनिक बलों, किसानों, श्रमिकों, डॉक्टरों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, सफाईकर्मियों, उद्यमियों और युवाओं के योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि देश का हर जागरूक नागरिक भारत के जीवंत गणतंत्र को सशक्त बना रहा है। प्रवासी भारतीयों की भूमिका की विशेष सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि वे विश्व मंच पर भारत की छवि को गौरव प्रदान कर रहे हैं।
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नारी शक्ति को बताया विकसित भारत की आधारशिला
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने नारी शक्ति की भूमिका पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं परंपरागत रूढ़ियों को तोड़कर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। महिला क्रिकेट, शतरंज और अन्य खेलों में भारत की उपलब्धियों को उन्होंने देश के बढ़ते वैश्विक दबदबे का प्रतीक बताया।
राष्ट्रपति ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व और नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला-नेतृत्व वाले विकास को नई ताकत देगा।
आदिवासी कल्याण और किसानों के सशक्तिकरण पर जोर
राष्ट्रपति मुर्मू ने जनजातीय समुदायों के कल्याण के लिए चलाए जा रहे अभियानों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत छह करोड़ से अधिक स्क्रीनिंग की जा चुकी हैं और एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में बड़ी संख्या में छात्र उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।
किसानों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उन्होंने कहा कि उचित मूल्य, सुलभ ऋण, बीमा, आधुनिक व जैविक खेती और पीएम किसान सम्मान निधि जैसे प्रयास किसानों को सशक्त बना रहे हैं।
आर्थिक प्रगति और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। आत्मनिर्भरता, स्वदेशी, जीएसटी, श्रम सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को उन्होंने आर्थिक मजबूती की नींव बताया।
वंदे मातरम् और राष्ट्रीय चेतना का स्मरण
राष्ट्रपति मुर्मू ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती (पराक्रम दिवस) का उल्लेख करते हुए राष्ट्रप्रेम और एकता की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।
‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से आगे बढ़ने का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने देशवासियों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ कार्य करने और एक समृद्ध, आत्मनिर्भर, शांतिपूर्ण एवं समावेशी भारत के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने सभी नागरिकों के सुख, शांति और उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ संदेश समाप्त किया।
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