चांद की वही चमकती सतह, लेकिन इस बार इरादे बिलकुल नए हैं! 50 साल से भी ज्यादा समय पहले जब नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर कदम रखा था, तब दुनिया दंग रह गई थी। लेकिन अब NASA Artemis II Mission के जरिए इतिहास को सिर्फ दोहराने नहीं, बल्कि उसे बदलने की तैयारी में है। Space Launch System (SLS) रॉकेट और Orion Spacecraft अब लॉन्च पैड 39B पर अपनी दहाड़ सुनाने को तैयार हैं। क्या आप जानते हैं कि 1960 के दशक के अपोलो मिशन और आज के आर्टेमिस में जमीन-आसमान का फर्क है? यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में इंसानी साम्राज्य की शुरुआत है। आइए जानते हैं इस महा-मिशन की पूरी कहानी।
शीत युद्ध की होड़ बनाम भविष्य की बसावट: मिशन के लक्ष्य
अपोलो मिशन का जन्म ‘शीत युद्ध’ के तनाव के बीच हुआ था। उस समय अमेरिका का एकमात्र लक्ष्य सोवियत संघ को पछाड़कर अपनी तकनीकी ताकत दिखाना था। वहां रफ्तार जरूरी थी, रुकना नहीं। लेकिन Artemis II Mission का लक्ष्य कहीं ज्यादा गहरा है। नासा अब सिर्फ झंडा गाड़ने नहीं जा रहा, बल्कि चांद के Southern Pole (दक्षिणी ध्रुव) पर इंसानों की स्थायी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है। यह मिशन भविष्य के Mars Mission (मंगल मिशन) के लिए एक ‘बेस कैंप’ की तरह काम करेगा। अब मुद्दा सिर्फ पहुंचना नहीं, बल्कि वहां रुकना और शोध करना है।
सैटर्न V से SLS तक: तकनीक की ऊंची उड़ान
तकनीकी मोर्चे पर 54 सालों में विज्ञान ने जो तरक्की की है, वह ओरियन स्पेसक्राफ्ट को देखकर समझ आती है। अपोलो मिशन Saturn -V रॉकेट पर निर्भर था, जो अपने समय का दिग्गज था। लेकिन आज का Space Launch System (SLS) दुनिया का सबसे शक्तिशाली ऑपरेशनल रॉकेट है।
-
स्पेस की उपलब्धता: ओरियन स्पेसक्राफ्ट में अपोलो कमांड मॉड्यूल की तुलना में 50% अधिक जगह है।
-
सुविधाएं: आधुनिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम के साथ-साथ अब अंतरिक्ष यात्रियों के लिए प्रॉपर टॉयलेट और बिजली के लिए विशाल सोलर पैनल मौजूद हैं, जो अपोलो के समय एक सपना था।
सुरक्षा सर्वोपरि: क्यों आर्टेमिस है पहले से ज्यादा सुरक्षित?
अंतरिक्ष यात्रा हमेशा जोखिम भरी होती है, लेकिन नासा ने अतीत की गलतियों से बहुत कुछ सीखा है। अपोलो मिशन में शुद्ध ऑक्सीजन का इस्तेमाल होता था, जिसके कारण ‘अपोलो 1’ के दौरान भीषण आग लग गई थी। Artemis II में अब पृथ्वी की तरह ही नाइट्रोजन और ऑक्सीजन का सुरक्षित मिश्रण इस्तेमाल किया जा रहा है। Modern Computing और Fault Detection System इतने एडवांस हैं कि खतरा होने से पहले ही सिस्टम उसे पहचान लेता है। साथ ही, अपोलो का सामान ‘वन-टाइम यूज़’ के लिए था, जबकि आर्टेमिस के कई हिस्से दोबारा इस्तेमाल (Reusable) किए जा सकेंगे।

