‘PM राहत’ योजना को मंजूरी, सड़क दुर्घटना पीड़ितों का होगा मुफ्त इलाज
नई दिल्ली | 15 फरवरी, 2026
भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग ने ग्रामीण भारत में उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। 2024-25 की सफल पहलों को आगे बढ़ाते हुए, विभाग ने पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ग्राम पंचायतों के लिए राष्ट्रव्यापी वर्चुअल क्षमता-निर्माण कार्यक्रम की दूसरी श्रृंखला का शुभारंभ किया है।
जमीनी स्तर पर समाधान (Complaint Redressal)
इस कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम छोर (Last Mile) पर बैठे उपभोक्ता को सशक्त बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया गया: प्रतिभागियों को कानून के तहत उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई।राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) और ई-जागृति पोर्टल जैसे डिजिटल मंचों के उपयोग के बारे में बताया गया ताकि ग्रामीण नागरिक घर बैठे अपनी शिकायतें दर्ज कर सकें। पंचायतों को सिखाया गया कि वे स्थानीय स्तर पर गलत व्यापारिक गतिविधियों को रोकने में कैसे भूमिका निभा सकते हैं।
क्षेत्रीय भाषाओं का प्रभाव
कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी क्षेत्रीय समावेशिता रही। संचार को प्रभावी बनाने के लिए सत्र संबंधित राज्यों की स्थानीय भाषाओं में आयोजित किए गए। राज्य की भाषाओं में निपुण अधिकारियों ने सत्रों की अध्यक्षता की, जिससे पंचायत प्रतिनिधियों ने बेझिझक अपनी स्थानीय समस्याएं साझा कीं और उनके समाधान पाए।
डिजिटल क्रांति और भविष्य की राह
वर्चुअल प्रारूप के कारण यह अभियान न केवल लागत प्रभावी रहा, बल्कि इसने कम समय में देशव्यापी पहुंच सुनिश्चित की है। 20 दिसंबर, 2024 से शुरू होकर 22 अगस्त, 2025 तक चले पिछले चरण में (दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़कर) सभी राज्यों को कवर किया गया था।
सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए, सरकार ने इस अभियान को और अधिक विस्तार देने का निर्णय लिया है। विभाग का लक्ष्य है कि हर ग्रामीण नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो और उसे समय पर न्याय मिले।
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