राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अभनपुर स्थित सोनपैरी गांव में बुधवार को भव्य हिंदू संगम सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम असंग देव कबीर आश्रम परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में साधु संत, स्वयंसेवक और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के लिए अधिक जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का समय है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया अनेक चुनौतियों से गुजर रही है और ऐसे समय में बंटने की नहीं बल्कि संगठित होने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जब भी देश पर संकट आता है, तब सबसे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक आगे खड़ा दिखाई देता है। संघ बिना किसी प्रचार के सेवा कार्य करता है। उन्होंने कहा कि हम केवल समस्याओं की चर्चा नहीं करते बल्कि उनके समाधान पर भी विचार करते हैं, क्योंकि जब समाज मजबूत होगा तो कोई भी संकट हमें कमजोर नहीं कर पाएगा।
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डॉ. भागवत ने समाज को मजबूत बनाने के लिए पांच बातों पर विशेष रूप से ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सबसे पहले समाज में भेदभाव समाप्त होना चाहिए और हर व्यक्ति को अपना मानकर व्यवहार करना चाहिए। सामाजिक समरसता तभी संभव है जब हम एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि दूसरा विषय परिवार से जुड़ा है। सप्ताह में कम से कम एक दिन परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठें, भोजन करें, भजन करें और आपसी संवाद बनाए रखें। इससे परिवार मजबूत होता है और संस्कार आगे बढ़ते हैं।
उन्होंने पर्यावरण को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और जल संकट गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं। इसके लिए हर व्यक्ति को अपने स्तर पर प्रयास करना होगा। पानी की बचत करनी होगी, सिंगल यूज प्लास्टिक से बचना होगा और अधिक से अधिक पेड़ लगाने होंगे। उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।
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संघ प्रमुख ने अपनी संस्कृति और भाषा को अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी मातृभाषा में बोलना चाहिए और जिस राज्य में रहते हैं वहां की भाषा का भी सम्मान करना चाहिए। अपनी परंपरा, वेशभूषा और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना ही सच्चा राष्ट्र प्रेम है। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा नहीं है बल्कि जीवन जीने की पद्धति है और संविधान में निहित मूल्यों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
अपने संबोधन में उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग भी सुनाया और कहा कि मनुष्य को बार-बार बाहरी शक्ति मांगने के बजाय अपने भीतर के भय को समाप्त करना चाहिए। जब भय समाप्त होता है तभी आत्मबल मजबूत होता है और व्यक्ति सही निर्णय ले पाता है। कार्यक्रम के दौरान एक भावुक दृश्य उस समय देखने को मिला जब सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने वरिष्ठ समाजसेवी उर्मिला नेताम को सहारा देकर भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित करवाए। यह दृश्य मातृत्व और सम्मान का प्रतीक बन गया।
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मुख्य अतिथि संत असंग देव महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को संगठित करने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि अकेला व्यक्ति कमजोर होता है, लेकिन संगठित समाज को कोई पराजित नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि मनुष्य जीवन अनमोल है और इसका सदुपयोग संस्कार और सेवा में होना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सरसंघचालक ने सोनपैरी गांव में कोविदार का पौधा रोपित किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा करना आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव, वरिष्ठ नेता धरमलाल कौशिक सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सम्मेलन में पूरे वातावरण में राष्ट्रभक्ति, संस्कार और एकता का भाव देखने को मिला।
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