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नई दिल्ली। शनिवार की शाम आसमान में उभरा चांद साधारण नहीं था। नए साल का पहला सुपरमून दिखाई दिया, जिसने देखते ही देखते लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जनवरी की पूर्णिमा पर नजर आने वाले इस चंद्रमा को वुल्फ मून कहा जाता है। यह आम पूर्णिमा की तुलना में करीब 30 प्रतिशत अधिक चमकदार और लगभग 14 प्रतिशत बड़ा दिखाई देता है। खगोल विज्ञान में इस दृश्य को फुल इल्यूजन भी कहा जाता है।
लखनऊ के साथ-साथ गुवाहाटी, भुवनेश्वर और कोलकाता सहित देश के कई शहरों में सुपरमून का शानदार नजारा देखने को मिला। सूर्यास्त के कुछ ही देर बाद चंद्रमा आसमान में उभरने लगा। राजधानी दिल्ली में यह दृश्य शाम करीब छह बजे से दिखना शुरू हुआ और सात बजे के आसपास बेहद मनमोहक नजर आया। लखनऊ में चंद्रमा क्षितिज के पास नीचे की ओर उगा, जिससे उसका रंग नारंगी-पीला दिखाई दिया और दृश्य और भी आकर्षक हो गया।
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पूर्वोत्तर से लेकर पूर्वी भारत तक गुवाहाटी, भुवनेश्वर और कोलकाता में भी लोगों ने इस खगोलीय घटना का भरपूर आनंद लिया। शहरों की रोशनी से दूर गांवों, जंगलों या ऊंची छतों से सुपरमून का नजारा और भी साफ व प्रभावशाली दिखा। कई खगोलप्रेमी बिना किसी विशेष उपकरण के ही इस दृश्य को निहारते रहे, जबकि कुछ लोगों ने दूरबीन के जरिए चंद्रमा की खूबसूरती को करीब से देखा। सोशल मीडिया पर भी चमकते चंद्रमा की तस्वीरें और वीडियो तेजी से साझा किए गए।
चंद्रमा का आकार बड़ा और चमकदार इसलिए दिखाई देता है क्योंकि उसकी कक्षा पूरी तरह गोल न होकर अंडाकार है। इस वजह से उसकी पृथ्वी से दूरी बदलती रहती है। जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु पर होता है, तब वह आम पूर्णिमा की तुलना में बड़ा और अधिक चमकीला दिखाई देता है। शनिवार की रात चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 3 लाख 62 हजार किलोमीटर की दूरी पर था।
जनवरी की पूर्णिमा को उत्तरी गोलार्ध में वुल्फ मून कहा जाता है। यह साल का वह समय होता है जब रातें लंबी और ठंड अधिक होती है। माना जाता है कि इस मौसम में जंगलों में भोजन की कमी के कारण भेड़िए रात के समय ज्यादा हुआं-हुआं करते हैं, और इसी लोककथा से वुल्फ मून नाम प्रचलित हुआ। खगोलविदों के अनुसार इस समय समुद्र में ज्वार-भाटे का प्रभाव भी कुछ अधिक देखा जाता है, जिससे यह खगोलीय घटना और भी खास बन जाती है।
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