*बिहान योजना में करोड़ों के सपनों पर भ्रष्टाचार का साया, निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मां*
(उमेश कुमार प्रजापति)अंबिकापुर सरगुजा जिले के मैनपाट में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। विकासखंड मैनपाट के ग्राम पंचायत नर्मदापुर में संचालित स्व-सहायता समूहों की वित्तीय गतिविधियों में कथित अनियमितताओं, ऋण राशि के दुरुपयोग और गबन के आरोपों को लेकर जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इस संबंध में कलेक्टर सरगुजा को शिकायत सौंपकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बिहान योजना के अंतर्गत कार्यरत पीआरपी ईल्का खेस एवं रितु यादव अन्य संबंधित व्यक्तियों द्वारा गरीब, अशिक्षित और जरूरतमंद महिलाओं को योजनाओं की वास्तविक जानकारी से वंचित रखते हुए उनके नाम पर विभिन्न ऋण योजनाओं और बैंक लिंकेज के माध्यम से राशि स्वीकृत कर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं। आरोप है कि महिलाओं की अनभिज्ञता का लाभ उठाकर योजनाओं को निजी लाभ का माध्यम बनाया गया और वित्तीय पारदर्शिता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया।
मामले में सबसे गंभीर प्रश्न यह उठ रहा है कि ऋण स्वीकृति, राशि निकासी, उपयोग और निगरानी की पूरी प्रक्रिया के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही। यदि योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही थी तो कथित रूप से इतनी बड़ी अनियमितताएं कैसे हुईं? शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह केवल कुछ व्यक्तियों की करतूत नहीं बल्कि पूरे निगरानी तंत्र की विफलता को उजागर करता है।
बिहान योजना को ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक उत्थान का मजबूत माध्यम बताया जाता है, लेकिन सरगुजा जिले में पिछले कई महीनों से विभिन्न विकासखंडों से लगातार वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में गहरा असंतोष है। आरोप है कि जांच और कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
गंभीर सवाल है कि बिहान योजना के अंतर्गत स्थापित कई आजीविका गतिविधियां और औद्योगिक इकाइयां केवल दस्तावेजों में संचालित दिखाई जाती हैं। वास्तविकता में उनका अस्तित्व नगण्य है। शासकीय आयोजनों और प्रदर्शनियों में समूहों की उपस्थिति तो दिखाई देती है, लेकिन अधिकांश इकाइयों की उत्पादन क्षमता, व्यापारिक गतिविधियां और आर्थिक परिणाम धरातल पर नजर नहीं आते। इससे योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बिहान योजना के नियमों के अनुसार पीआरपी की नियुक्ति संबंधित क्षेत्र से बाहर की होनी चाहिए, जबकि संबंधित पीआरपी स्थानीय क्षेत्र की निवासी बताई जा रही हैं। इससे हितों के टकराव, प्रभाव के दुरुपयोग और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायत के अनुसार निम्नलिखित समूहों की राशि में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है—
अमिला स्व-सहायता समूह, दांतीडबरा – बैंक लिंकेज ऋण राशि ₹3,00,000
महामाया स्व-सहायता समूह, रंगुआपारा – बैंक लिंकेज ऋण राशि ₹80,000
सूरजमुखी स्व-सहायता समूह, विहीपारा – एमसीपी राशि ₹60,000
संपदा स्व-सहायता समूह – लगभग ₹60,050 की राशि में अनियमितता का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ग्राम संगठन, एमसीपी तथा बैंकों से प्राप्त सीसीएल ऋण की राशि के उपयोग में गंभीर वित्तीय गड़बड़ियां हुई हैं। साथ ही संबंधित बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की गई है।
ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के नाम पर यदि योजनाओं को भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और वित्तीय अनियमितताओं का माध्यम बनाया जा रहा है, तो यह न केवल शासन की मंशा के विपरीत है बल्कि उन हजारों महिलाओं के साथ भी अन्याय है जो बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर इन योजनाओं से जुड़ी हैं। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे मामले की न्यायिक या उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि गरीब और कम शिक्षित महिलाओं का विश्वास शासन की योजनाओं पर बना रहे


