देहरादून: भारत में हाथियों और ट्रेनों के बीच होने वाली टक्करों की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक ठोस और वैज्ञानिक सुरक्षा रोडमैप तैयार किया है। देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में पर्यावरण मंत्रालय और रेल मंत्रालय ने हाथियों की अकाल मृत्यु को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इस योजना के तहत देश के 14 राज्यों में फैले लगभग 1,965 किलोमीटर लंबे 77 रेलवे खंडों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है। इन इलाकों में हाथियों के प्राकृतिक आवास और आवाजाही सबसे अधिक है, जहाँ अब व्यापक सुधार कार्य किए जाएंगे।
हाथियों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कुल 705 विशेष संरचनाओं के निर्माण की सिफारिश की है। इस विशाल बुनियादी ढांचे में 65 नए अंडरपास और 22 ओवरपास शामिल हैं, ताकि हाथी पटरियों के संपर्क में आए बिना उनके नीचे या ऊपर से सुरक्षित गुजर सकें। इसके अलावा 503 स्थानों पर विशेष रैंप और लेवल क्रॉसिंग बनाए जाएंगे जिससे हाथियों को ऊंचे रेलवे ट्रैक पर चढ़ने और उतरने में कोई कठिनाई न हो। हाथियों के पुराने रास्तों में आने वाले 72 रेल पुलों के डिजाइन में भी बदलाव किया जाएगा ताकि उन्हें हाथियों की आवाजाही के अनुकूल बनाया जा सके।
तकनीक के मोर्चे पर भी सरकार ने ‘घुसपैठ पहचान प्रणाली’ (IDS) और एआई (AI) आधारित कैमरों का सहारा लिया है। असम और पश्चिम बंगाल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में एकॉस्टिक सेंसर तकनीक लगाई जा रही है, जो हाथियों के पैरों के कंपन से उनके आने की सूचना वन और रेलवे अधिकारियों को दे देगी। तमिलनाडु के मदुक्कराई में थर्मल और मोशन-सेंसिंग तकनीक से लैस टावरों का नेटवर्क स्थापित किया गया है, जो पटरी के 100 मीटर के दायरे में किसी भी हलचल का पता लगा लेता है। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की नई रेलवे परियोजनाओं में भी इन वन्यजीव-अनुकूल उपायों को निर्माण के समय ही शामिल किया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य तकनीक और बुनियादी ढांचे के समन्वय से हाथियों की सुरक्षा के लिए एक ऐसा स्थायी तंत्र विकसित करना है, जिससे भविष्य में रेल पटरियों पर होने वाले हादसों को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।


