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प्रदेश में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार मैनेजमेंट कोटे के तहत प्रवेश लेने वाले छात्रों को भी छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ देने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो प्रदेश के एक लाख से अधिक विद्यार्थियों को सीधा फायदा मिलेगा।
दरअसल, मैनेजमेंट कोटे में वे छात्र शामिल होते हैं, जो किसी राज्य या राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए बिना निजी कॉलेजों में सीधे दाखिला लेते हैं। इनमें इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट और बीएड जैसे पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी प्रमुख रूप से शामिल होते हैं। अभी तक इस श्रेणी में केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों को ही छात्रवृत्ति का लाभ दिया जा रहा था, जबकि सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को यह सुविधा वर्ष 2017-18 में बंद कर दी गई थी।
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उस समय शासन ने यह फैसला इसलिए लिया था, क्योंकि सीधे प्रवेश के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई थीं। कई मामलों में एससी-एसटी वर्ग के छात्रों के नाम पर दाखिला दिखाकर छात्रवृत्ति और फीस प्रतिपूर्ति की राशि हड़प ली गई थी। यह भी सामने आया था कि बड़ी संख्या में छात्र पहले साल के बाद पढ़ाई छोड़ देते थे, लेकिन उनके नाम पर अनुदान लिया जाता रहा।
अब एक बार फिर सरकार इस योजना को लागू करने पर विचार कर रही है, लेकिन इस बार सख्त निगरानी व्यवस्था के साथ। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, पिछली गलतियों से सबक लेते हुए नई व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो सके।
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अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो करीब एक लाख अतिरिक्त छात्र छात्रवृत्ति योजना के दायरे में आएंगे। हालांकि इससे सरकार पर 250 से 300 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है। इस मुद्दे पर शासन स्तर पर मंथन पूरा हो चुका है और जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
शिक्षा विभाग के जानकारों का मानना है कि यदि यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को निजी संस्थानों में पढ़ाई का बेहतर अवसर मिलेगा और उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। वहीं, सरकार के सामने चुनौती यह रहेगी कि योजना का दुरुपयोग न हो और वास्तविक जरूरतमंदों तक ही इसका लाभ पहुंचे।
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