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ट्रेन में आग लगने से एक यात्री की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि लोको पायलट की सूझबूझ से 158 यात्रियों की जान बच गई। यह दर्दनाक हादसा आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से करीब 66 किलोमीटर दूर येलमंचिली के पास रविवार देर रात हुआ। टाटानगर–एर्नाकुलम एक्सप्रेस के दो डिब्बों में अचानक आग लग गई, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।
रात करीब 12 बजकर 45 मिनट पर ट्रेन के बी-1 कोच में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने पास के एम-2 कोच को भी अपनी चपेट में ले लिया। उस समय बी-1 कोच में 82 और एम-2 कोच में 76 यात्री सवार थे। आग की लपटें उठते ही यात्रियों ने इमरजेंसी चेन खींच दी और जान बचाने के लिए ट्रेन से बाहर निकलने लगे। इसी दौरान 70 वर्षीय चंद्रशेखर सुंदरम आग की चपेट में आ गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे की जानकारी मिलते ही लोको पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए ट्रेन को तुरंत रोका और दोनों जले हुए कोचों को अलग कर दिया। अगर समय रहते यह फैसला नहीं लिया जाता तो आग पूरी ट्रेन में फैल सकती थी और बड़ा हादसा हो सकता था। लोको पायलट की तत्परता से 158 यात्रियों की जान बच सकी।
आग की चपेट में आने से दोनों कोच पूरी तरह जल गए। यात्रियों का सामान भी आग में खाक हो गया। इसके बाद रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को वैकल्पिक साधनों से उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की। मौके पर पहुंची रेलवे और पुलिस की टीमों ने स्थिति को नियंत्रित किया।
घटना की जांच के लिए दो फोरेंसिक टीमों को लगाया गया है। शुरुआती तौर पर आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। रेलवे प्रशासन ने मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।
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यह हादसा एक बार फिर ट्रेनों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। हालांकि लोको पायलट की सतर्कता और त्वरित निर्णय से एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन एक यात्री की मौत ने पूरे सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सोच की जरूरत को उजागर कर दिया है।

