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नई दिल्ली/रायपुर:

ग्रामीण भारत में जमीन के मालिकाना हक को लेकर होने वाले विवादों को खत्म करने और गांवों के सुनियोजित विकास के लिए केंद्र सरकार की ‘स्वामित्व’ (SVAMITVA) योजना एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। 10 फरवरी 2026 को लोकसभा में केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने जानकारी दी कि सरकार ने अब तक देश के 1.86 लाख गांवों में सर्वेक्षण का काम पूरा कर 3.06 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार कर लिए हैं। इस योजना के जरिए पहली बार गांवों की आबादी वाले क्षेत्रों का डिजिटल नक्शा तैयार किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का कानूनी दस्तावेज मिल रहा है।

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योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ भी मजबूती से कदम बढ़ा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 2,557 गांवों में सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जिसके आधार पर अब तक 1,96,757 संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। इससे राज्य के हजारों ग्रामीण परिवारों को अपनी घर-जमीन का स्पष्ट मालिकाना हक मिल गया है, जिसका उपयोग वे अब बैंक ऋण लेने या अन्य वित्तीय कार्यों के लिए कानूनी दस्तावेज के रूप में कर सकेंगे।

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5 सेमी तक की सटीकता: हाई-टेक ड्रोन का कमाल

इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसकी आधुनिक तकनीक है। गांवों की तंग गलियों और घरों की सीमाओं को सटीक रूप से मापने के लिए ड्रोन-आधारित हवाई सर्वेक्षण और निरंतर संचालित संदर्भ स्टेशनों (CORS) के नेटवर्क का उपयोग किया जा रहा है। ये नक्शे 1:500 के पैमाने पर तैयार किए जाते हैं, जिनकी सटीकता 5 सेंटीमीटर तक होती है। इस उच्च-रिज़ॉल्यूशन तकनीक की वजह से सीमाओं का सटीक सीमांकन संभव हो पाया है, जिससे भविष्य में पड़ोसी विवादों की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी।

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विवादों का निपटारा और पारदर्शिता

सर्वेक्षण केवल मशीनी नहीं है, बल्कि इसमें ग्रामीणों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। ड्रोन सर्वे के बाद स्थानीय अधिकारियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में जमीन पर सत्यापन (Ground Verification) किया जाता है। यदि किसी ग्रामीण को नक्शे या सीमा पर आपत्ति होती है, तो संपत्ति कार्ड जारी करने से पहले उन शिकायतों का विधिवत निपटारा किया जाता है। वर्तमान में देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह योजना सक्रिय रूप से लागू है।

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उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सबसे आगे

संपत्ति कार्ड जारी करने के मामले में उत्तर प्रदेश (1.14 करोड़) और मध्य प्रदेश (65.65 लाख) देश में सबसे आगे चल रहे हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में देश के हर गांव को इस डिजिटल मानचित्रण के दायरे में लाना है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिल सके और हर ग्रामीण अपनी संपत्ति का वास्तविक स्वामी बन सके।

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