महासमुंद। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में संलग्नीकरण यानी अटैचमेंट का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। शासन और लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से बार-बार जारी किए जा रहे सख्त निर्देशों के बावजूद महासमुंद जिले में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक और डीपीआई के स्पष्ट आदेशों के बाद भी जिले के कई शिक्षक अपनी मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में जाकर पढ़ाने के बजाय कार्यालयों की मलाईदार कुर्सियों पर काबिज हैं।

क्या है पूरा मामला
राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी कार्यालयों में अटैच शिक्षकों को तत्काल उनके मूल शिक्षण संस्थानों में कार्यमुक्त करने का आदेश दिया है। 23 जून को स्कूल शिक्षा मंत्री द्वारा ली गई बैठक और 25 जून को डीपीआई द्वारा जारी निर्देश के बाद उम्मीद थी कि व्यवस्था में सुधार आएगा, लेकिन महासमुंद में स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन की लचर निगरानी और उच्च अधिकारियों की चुप्पी ने इस व्यवस्था को हास्यास्पद बना दिया है।

कुर्सी बचाने के लिए सक्रिय लॉबी तंत्र
शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो जैसे ही शिक्षकों को स्कूल वापस भेजने की सुगबुगाहट शुरू हुई, एक नया लॉबी तंत्र सक्रिय हो गया। स्कूल जाने के बजाय ये शिक्षक राजनीतिक गलियारों के चक्कर लगाते और विधायक कार्यालयों में सिफारिशें लगवाते देखे जा रहे हैं। हाल ही में जब जिला शिक्षा अधिकारी ने इन शिक्षकों से पूछा कि वे कब अपने मूल विद्यालय जाकर पढ़ाना चाहते हैं, तो किसी ने भी अपनी इच्छा जाहिर नहीं की। सभी ने कार्यालयों में ही डटे रहने की जिद पकड़ ली है।

इन पदों पर जमे हैं शिक्षक
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के कई शिक्षक पात्रता न होने के बावजूद महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कुंडली मारकर बैठे हैं।
रेख राज शर्मा, प्रधान पाठक: जिला मिशन समन्वयक (डीएमसी)
श्रीमती सम्पा बोस, व्याख्याता एलबी (तुसदा): एपीसी, समग्र शिक्षा
श्रीमती विद्या साहू, व्याख्याता एलबी (बकमा): एपीसी, समग्र शिक्षा
सुबोध कुमार तिवारी, व्याख्याता एलबी (नर्रा): एपीसी, समग्र शिक्षा
प्रमोद कन्नौजे, व्याख्याता (नयापारा): एडीपीओ, समग्र शिक्षा

इनके अलावा विकासखंड स्तर पर भी जागेश्वर सिन्हा (बीआरसी महासमुंद), रमता मन्नाडे, पूर्णानंद मिश्रा, श्रीमती भूपेश्वरी साहू (बीआरसी बागबाहरा), नरेश पटेल (बीआरसी पिथौरा), अनिल सिंह साव (बीआरसी बसना) और देवानंद नायक (बीआरसी सरायपाली) समेत कई अन्य शिक्षक नियमों को दरकिनार कर प्रशासनिक कामकाज संभाल रहे हैं।

विधायक की शिक्षा मंत्री से गुहार
महासमुंद विधायक ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पत्र लिखकर मांग की है कि जिला परियोजना कार्यालय और विकासखंड स्रोत केंद्रों में कार्यरत कर्मचारियों को कार्यमुक्त न किया जाए। विधायक का तर्क है कि इनके कार्यमुक्त होने से विभागीय कार्यों में बाधा आ रही है। उनका कहना है कि कार्यालयीन कार्यों की सुगमता को देखते हुए मैंने मंत्री जी से आग्रह किया है कि कलेक्टर द्वारा आदेशित कर्मचारियों को कार्यमुक्त न कर उन्हें प्रतिनियुक्ति पर कार्य करने की अनुमति दी जाए।
बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़
यह स्थिति गंभीर सवाल खड़ा करती है कि जब शिक्षक ही स्वयं बच्चों के बीच क्लास लेने में रुचि नहीं दिखा रहे, तो सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधरेगी? शासन का स्पष्ट निर्देश था कि शिक्षक वापस अपने स्कूलों में जाकर बच्चों को पढ़ाएं, जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है। लेकिन यहां शिक्षा से ज्यादा कुर्सी की चिंता हावी है।

संचनालय से आदेश जारी हुआ है। उस पर समस्त संलग्नीकरण शिक्षकों को नोटिस जारी कर दिया गया है। उनको जल्द ही उनके मूल पद पर वापस भेज दिया जाएगा।
बीएल देवांगन, जिला शिक्षा अधिकारी, महासमुंद

अब महासमुंद की जनता और शिक्षा जगत की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या शासन अपने ही आदेशों का पालन करवा पाएगा, या फिर राजनीतिक सिफारिशों के आगे नियम एक बार फिर पुरानी फाइलों में दब जाएंगे? यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इन शिक्षकों की घर वापसी होती है या फिर कुर्सी बचाओ लॉबी का दबदबा बरकरार रहता है।

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