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जशपुरनगर
डिजिटल युग में जहां अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है वहीं साइबर थाना आम नागरिकों के लिए सुरक्षा की मजबूत ढाल बनकर उभरा है। ऑनलाइन ठगी फर्जी कॉल सोशल मीडिया के दुरुपयोग बैंकिंग फ्रॉड और पहचान चोरी जैसे अपराधों पर अंकुश लगाने में साइबर थाना अहम भूमिका निभा रहा है।
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साइबर थाना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें तकनीक के माध्यम से अपराध की जड़ तक पहुंच बनाई जाती है। मोबाइल नंबर ईमेल आईडी सोशल मीडिया अकाउंट आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रांजेक्शन के आधार पर अपराधियों की पहचान की जाती है। इससे पारंपरिक जांच की तुलना में अपराध सुलझाने की प्रक्रिया तेज और सटीक हो जाती है।
क्राइम कंट्रोल में साइबर थाना का बड़ा फायदा यह है कि अपराध होने के तुरंत बाद शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में समय सबसे अहम होता है और साइबर थाना त्वरित कार्रवाई कर खाते फ्रीज कराने राशि होल्ड कराने और डिजिटल सबूत सुरक्षित करने में सक्षम होता है। इससे पीड़ित को न्याय मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
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साइबर थाना में काम करने की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी और व्यवस्थित होती है। शिकायत मिलते ही डिजिटल फॉरेंसिक के जरिए डाटा का विश्लेषण किया जाता है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड बैंक ट्रांजेक्शन लॉग सोशल मीडिया गतिविधि और सर्वर लोकेशन के आधार पर अपराध की कड़ी जोड़ी जाती है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित बैंक टेलीकॉम कंपनी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से समन्वय कर कार्रवाई की जाती है।
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साइबर थाना न केवल अपराध के बाद कार्रवाई करता है बल्कि लोगों को जागरूक करने में भी अहम भूमिका निभाता है। स्कूल कॉलेज कार्यालय और ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर जागरूकता कार्यक्रम चलाकर लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचने के उपाय बताए जाते हैं। इससे साइबर अपराध की रोकथाम में भी मदद मिलती है।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर थाना की सक्रियता से ऑनलाइन अपराधियों में भय का माहौल बना है। लगातार ट्रैकिंग और तकनीकी निगरानी के कारण साइबर अपराधियों के लिए बच निकलना आसान नहीं रहा। आने वाले समय में साइबर थाना को और सशक्त कर डिजिटल अपराध पर निर्णायक नियंत्रण की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
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