दुनिया की दुर्लभ खोज: डायनासोरों से भी 7 करोड़ साल पुराना ‘पाताल लोक’, झारखंड की कोयला खदानों में मिली करोड़ों साल पुरानी दुनिया”

CG NOW विशेष | रायपुर / सैय्यद समीर इरफ़ान 

छत्तीसगढ़ की राजनीति में यदि कोई नाम आज संघर्ष, सेवा और स्वच्छ छवि का पर्याय बन चुका है, तो वह नाम है विष्णुदेव साय। यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि जनसेवा, मेहनत और दृढ़ संकल्प की एक ऐसी गौरवशाली कहानी है, जिसने गाँव के सरपंच से लेकर देश के लोकसभा सांसद, केंद्रीय मंत्री और अब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बनने तक का ऐतिहासिक सफर तय किया है।21 फरवरी को जशपुर जिले के ग्राम बगिया में जन्मे श्री साय का जीवन यह सिद्ध करता है कि सच्चा नेतृत्व केवल सत्ता प्राप्ति तक सीमित नहीं होता, बल्कि जनसेवा की भावना ही उसे शिखर तक पहुँचाती है।

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सुरों के सन्यासी बुद्धमनः जिनकी लहराती आवाज और सुर से हवा गुनगुनाती है,माटी महकती है और पहाड़ थिरकते हैं, लोगों की धड़कनें तेज हो जाती है, जशपुर की खुशबू और छोटा नागपुर का गौरव

एक साधारण किसान परिवार में जन्मे विष्णुदेव साय का जीवन शुरुआती दौर में काफी संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने संसाधनों की कमी को कभी अपनी बाधा नहीं बनने दिया। लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कुनकुरी से शिक्षा पूरी करने के साथ ही उनके भीतर जनसेवा का संकल्प मजबूत होता गया।

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उनकी राजनीतिक यात्रा की नींव ग्राम पंचायत के सरपंच के रूप में पड़ी, जहाँ उन्होंने अपने निष्पक्ष प्रशासन से जनता का अटूट भरोसा जीता। जशपुर राजपरिवार के स्व. दिलीप सिंह जूदेव ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनके मार्गदर्शन में साय ने राजनीति की पगडंडियों से सत्ता के शिखर तक का सफर तय किया।

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वर्ष 1999 से 2014 तक लगातार चार बार रायगढ़ लोकसभा सीट जीतकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में उन्हें खान, इस्पात और श्रम मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई, जहाँ उन्होंने अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया।

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13 दिसंबर 2023 को जब उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो यह प्रदेश में ‘सुशासन के एक नए युग’ की शुरुआत थी। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने आदिवासी विकास, कृषि सुधार और महिला सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकता बनाया, जिसके कारण आज जनता उन्हें अपना सबसे बड़ा जननेता मानती है।

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मुख्यमंत्री साय ने अपने दो वर्षों के कार्यकाल में ऐसे ऐतिहासिक फैसले लिए हैं जो भविष्य के लिए मिसाल बन गए हैं। एक किसान पुत्र होने के नाते उन्होंने किसानों के दर्द को समझा और देश में सर्वाधिक 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी सुनिश्चित की।

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इस वर्ष होली से पहले ‘कृषक उन्नति योजना’ के तहत लगभग 10 हजार करोड़ रूपए का एकमुश्त भुगतान कर उन्होंने किसानों के घर में खुशहाली ला दी है। इसके साथ ही ‘महतारी वंदन योजना’ के जरिए 70 लाख महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना और वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ घोषित करना उनके संवेदनशील नेतृत्व का परिचायक है।

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उनके सुशासन में न केवल सामाजिक सुरक्षा मजबूत हुई है, बल्कि बुनियादी ढांचे का भी अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। 26 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति और बस्तर को रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली रावघाट-जगदलपुर परियोजना उनकी दूरदर्शिता के उदाहरण हैं।

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उनके नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्हें ‘सच्चा जनसेवक’ बताया है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह उनकी बेदाग छवि और सादगी के कायल हैं। जशपुर की माटी की खुशबू और निष्ठा के दीप लिए विष्णुदेव साय आज उस धूमकेतु की तरह चमक रहे हैं, जिनकी रोशनी से छत्तीसगढ़ का स्वर्णिम भविष्य सुनिश्चित हो रहा है।

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“माटी की खुशबू, सेवा का रंग, निष्ठा के दीप, सादगी के संग। संघर्ष की राहों के दृढ़ पथिक, हर दिल में बसी है जिनकी झलक। जनता की आशा, कर्म के राही, सच की रोशनी, उम्मीद की बाँही। ऐसे युगपुरुष को कोटि-कोटि प्रणाम।”
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