छत्तीसगढ़ में जमीन डायवर्सन प्रक्रिया हुई ऑनलाइन, साय सरकार का बड़ा फैसला
रायपुर 13 दिसंबर 2025
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भूमि प्रशासन और भूमि मूल्यांकन व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में दो बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। एक ओर जहां प्रदेश में जमीनों के डायवर्सन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और अर्द्ध शहरी क्षेत्रों में भूमि मूल्यांकन के लिए लागू वर्ग मीटर दर को समाप्त कर केवल हेक्टेयर दर आधारित व्यवस्था लागू की गई है। इन दोनों फैसलों से आम नागरिकों, किसानों, भू धारकों और निवेशकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार ने जमीन डायवर्सन की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। अब नागरिक घर बैठे अपनी भूमि का ऑनलाइन डायवर्सन करा सकेंगे। राजस्व विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है, जिसे राजपत्र में प्रकाशित किया गया है। अधिसूचना के अनुसार अब भूमि डायवर्सन के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे प्रक्रिया अधिक तेज, सरल और पारदर्शी हो जाएगी तथा लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी।
सरकार के इस निर्णय के तहत नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों, उनकी बाह्य सीमाओं से 5 किलोमीटर तक के क्षेत्र, नगर पंचायत क्षेत्रों, नगर पंचायत की बाह्य सीमाओं से 2 किलोमीटर तक के क्षेत्र तथा ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि डायवर्सन के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक नहीं होगी। हालांकि नियमानुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा संबंधित भूमियों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। डिजिटल आवेदन व्यवस्था से समय की बचत के साथ साथ पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा।
छत्तीसगढ़ में जमीन डायवर्सन प्रक्रिया हुई ऑनलाइन, साय सरकार का बड़ा फैसला
इसी क्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुसार वित्त एवं वाणिज्य कर पंजीयन मंत्री ओपी चौधरी के नेतृत्व में सरकार ने भूमि मूल्यांकन व्यवस्था में भी बड़ा सुधार किया है। पेरी अर्बन ग्रामों सहित सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू वर्ग मीटर दर को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब ग्रामीण एवं अर्द्ध शहरी क्षेत्रों में भूमि का मूल्यांकन केवल हेक्टेयर दर के आधार पर किया जाएगा, जिससे स्टाम्प और पंजीयन शुल्क में उल्लेखनीय कमी आएगी और आम नागरिकों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
पूर्व व्यवस्था में ग्रामीण क्षेत्रों में 500 वर्ग मीटर तक की भूमि का मूल्यांकन वर्ग मीटर दर से और उससे अधिक भूमि का मूल्यांकन हेक्टेयर दर से किया जाता था। चूंकि वर्ग मीटर दर अधिक होती थी, इसलिए छोटे भूखंडों पर अधिक मूल्य और शुल्क लग जाता था जबकि बड़े भूखंड अपेक्षाकृत सस्ते पड़ते थे। इस विसंगति को समाप्त करते हुए सरकार ने सभी ग्रामीण भूमियों के लिए एक समान हेक्टेयर आधारित मूल्यांकन प्रणाली लागू की है।
नई व्यवस्था से भूमि अधिग्रहण मामलों में भी वास्तविक क्षेत्रफल के अनुरूप न्यायसंगत मुआवजा सुनिश्चित होगा। बालोद जिले के ग्राम देवारभाट जैसे उदाहरणों से स्पष्ट है कि अब भूमि का मूल्यांकन अधिक तर्कसंगत और संतुलित हो गया है। वर्ग मीटर दर समाप्त होने से स्टाम्प और रजिस्ट्री शुल्क में भी हजारों रुपये की सीधी बचत हो रही है, जिससे किसानों, भू धारकों और आम खरीदारों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिल रही है।
राज्य सरकार के ये दोनों फैसले ग्रामीण और अर्द्ध शहरी जनता के हित में दूरगामी प्रभाव वाले माने जा रहे हैं। भूमि लागत कम होने और प्रक्रियाओं के ऑनलाइन होने से रियल एस्टेट, आवास निर्माण, निवेश और विकास कार्यों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का उद्देश्य भूमि और आवास से जुड़ी व्यवस्थाओं को अधिक सुलभ, किफायती और पारदर्शी बनाना है और ये फैसले उसी दिशा में मजबूत कदम के रूप में देखे जा रहे हैं।
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