आमतौर पर जब भी गुलाब जामुन का नाम आता है, तो आंखों के सामने चाशनी में डूबी गरम-गरम गोल मिठाइयां घूमने लगती हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी पेड़ की टहनियों पर भी गुलाब जामुन लटक सकते हैं? जी हां, प्रकृति ने हमें एक ऐसा अनोखा उपहार दिया है जिसे दुनिया ‘रोज एप्पल’ या ‘गुलाब जामुन फल’ के नाम से जानती है। यह फल न केवल अपनी खुशबू में गुलाब जैसा है, बल्कि इसे खाने पर स्वाद भी बिल्कुल वैसा ही महसूस होता है जैसा किसी मशहूर मिठाई की दुकान के गुलाब जामुन का होता है।

प्रकृति का अनमोल ऑर्गेनिक उपहार और खेतों में बिखरा चिमटी साग का जादुई स्वाद
इस अद्भुत फल की शुरुआत फरवरी के महीने से होती है और अप्रैल से जून की तपती गर्मियों तक यह पूरी तरह पककर तैयार हो जाता है। देखने में यह हल्का पीलापन लिए हरे रंग का और आकार में छोटे अमरूद जैसा नजर आता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी रसीली ऊपरी परत है, जिसे खाते ही मुँह में गुलाब की सौंधी महक और एक अनोखी मिठास घुल जाती है।

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मध्य प्रदेश के शहडोल और छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कई क्षेत्रों में ये पेड़ इन दिनों फलों से लदे हुए मिलते हैं। स्वाद के अलावा यह फल सेहत का भी बड़ा खजाना माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि इसके बीज और पत्तों में जादुई औषधीय गुण छिपे हैं।
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इन बीजों को सुखाकर बनाया गया पाउडर शुगर यानी डायबिटीज को नियंत्रित करने में रामबाण की तरह काम करता है। साथ ही इसमें मौजूद विटामिन-सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। दिलचस्प बात यह है कि इस फल को पश्चिम बंगाल में ‘गुलाब जाम’ और कर्नाटक में ‘रोज एप्पल’ जैसे अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है।


खास बात यह है कि इस पेड़ को उगाने के लिए किसी महंगे कीटनाशक या बहुत ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं पड़ती। बस समय पर थोड़ा पानी और जैविक खाद मिले, तो यह उष्णकटिबंधीय पौधा किसी भी किसान की किस्मत बदल सकता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की जलवायु इसके लिए बेहद अनुकूल है। अगर सरकारी स्तर पर या किसानों द्वारा इसे बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाए, तो यह न केवल लोगों को एक नया स्वाद देगा, बल्कि खेती की दुनिया में मुनाफे का एक मीठा और सेहतमंद जरिया भी बन सकता है।
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