बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ: नीति से नेतृत्व तक, आंकड़ों में देखिए कैसे सशक्त हो रही है देश की लाडली!
सुरक्षित बचपन और सशक्त नारी: भारत सरकार की त्रिकोणीय सुरक्षा रणनीति
नई दिल्ली | 06 फरवरी 2026 भारत सरकार ने देश की महिलाओं और बच्चों के लिए एक ऐसी सुरक्षा ढाल तैयार की है, जिसमें कठोर कानून, सामाजिक बदलाव और आर्थिक सशक्तिकरण का अनूठा संगम है। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के साथ आगे बढ़ रही है।
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इस सुरक्षा रणनीति की पहली कड़ी भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 है, जिसने मानव तस्करी को अब एक ‘संगठित अपराध’ की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। जहाँ एक ओर धारा 143 और 144 के तहत बच्चों और महिलाओं की तस्करी के लिए अनिवार्य न्यूनतम सजा और मृत्युदंड जैसे कठोर प्रावधान किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर POCSO अधिनियम के तहत यह स्पष्ट कर दिया गया है कि 18 वर्ष से कम उम्र के साथ किया गया कोई भी यौन कृत्य अपराध ही होगा। सरकार ने ‘सहमति की आयु’ को 18 वर्ष पर अडिग रखकर यह संदेश दिया है कि नाबालिगों के साथ किसी भी प्रकार के छल या शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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पुनर्वास और स्वास्थ्य सुरक्षा
कानून के साथ-साथ पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए सरकार ने ‘मिशन शक्ति’ और ‘शक्ति सदन’ जैसे सुरक्षा तंत्र विकसित किए हैं। यहाँ तस्करी से बचाई गई महिलाओं को आश्रय और व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य के मोर्चे पर ‘आयुष्मान भारत’ योजना 55 करोड़ नागरिकों को सुरक्षा दे रही है, जबकि जन औषधि केंद्रों के माध्यम से मात्र 1 रुपये में सैनिटरी पैड उपलब्ध कराकर महिलाओं की गरिमा सुनिश्चित की जा रही है।
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बदलता सामाजिक नजरिया: ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’
सरकार की इन कोशिशों का सबसे सकारात्मक चेहरा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के रूप में सामने आया है। यह पहल अब एक सरकारी नीति से बढ़कर एक ‘राष्ट्रीय आंदोलन’ बन चुकी है। इसके परिणामस्वरूप, राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात (SRB) 2014-15 के 918 से बढ़कर 929 (2024-25) हो गया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी लड़कियों की भागीदारी बढ़ी है और सेकेंडरी स्कूलों में उनका नामांकन अब 80.2 प्रतिशत तक पहुँच गया है।
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आर्थिक सशक्तिकरण की नींव
तस्करी और शोषण की जड़ ‘गरीबी’ पर प्रहार करने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुद्रा योजना और जन धन योजना को ढाल बनाया है। मुफ्त राशन, पक्का घर (PMAY), स्वच्छ ईंधन (उज्ज्वला) और हर घर जल जैसी बुनियादी सुविधाओं ने महिलाओं के जीवन स्तर को ऊंचा उठाया है। इन योजनाओं के माध्यम से सीधे लाभ हस्तांतरण (DBT) ने महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया है, जिससे वे और उनका परिवार किसी भी प्रकार के प्रलोभन या अपराध के प्रति कम संवेदनशील हुए हैं।
सरकार का यह एकीकृत प्रयास न केवल अपराधियों के मन में भय पैदा कर रहा है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और सुरक्षा का एक नया वातावरण भी निर्मित कर रहा है।

