संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा घोषित सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणामों में छत्तीसगढ़ के युवाओं ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के दम पर देश भर में प्रदेश का मान बढ़ाया है। राजधानी रायपुर से लेकर बीजापुर के दूरस्थ अंचलों तक के युवाओं ने सफलता का परचम लहराया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सफल अभ्यर्थियों को उनके कठिन परिश्रम और समर्पण के लिए बधाई दी है, वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी वैभवी अग्रवाल, दर्शना सिंह, डायमंड सिंह ध्रुव, रौनक अग्रवाल और संजय डहरिया सहित अन्य सफल अभ्यर्थियों की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के सपनों को नई ऊर्जा देने वाली प्रेरणा बताया है।
सफलता प्राप्त करने वाले युवाओं में राजधानी रायपुर की वैभवी अग्रवाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 35वीं रैंक हासिल की है, जो पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। इसी तरह मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की रहने वाली दर्शना सिंह ने 383वीं रैंक प्राप्त की है। आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग करने वाली दर्शना ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद दूसरे ही प्रयास में यह मुकाम हासिल किया है और अब वे आईपीएस बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं। धमतरी जिले के युवा अधिकारी डायमंड सिंह ध्रुव ने 623वीं रैंक हासिल की है। वर्तमान में डीएसपी के पद पर कार्यरत डायमंड की सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के, पूर्णतः स्व-अध्ययन और अनुशासन के बल पर यह मुकाम पाया है।
बीजापुर जिले के भैरमगढ़ निवासी अंकित सकनी ने 816वीं रैंक लाकर साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी भूगोल की मोहताज नहीं होती और दूरस्थ अंचलों से भी सफलता के शिखर को छुआ जा सकता है। वहीं महासमुंद के संजय डहरिया ने 946वीं रैंक हासिल की है। संजय की सफलता एक प्रेरणादायक संघर्ष गाथा है; उन्होंने 2012 से 2018 तक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने और उसका इलाज कराने के बावजूद हार नहीं मानी। तीन प्रयासों में सफलता हासिल करने वाले संजय ने साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों, तो बीमारी भी राह का रोड़ा नहीं बन सकती।
इन सभी युवाओं की सफलता का असर पूरे प्रदेश में दिख रहा है और विभिन्न जिलों के कलेक्टरों ने भी अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया है। इन युवाओं ने न केवल अपने परिवारों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है, बल्कि छत्तीसगढ़ के युवाओं में यह विश्वास जगाया है कि सही योजना, निरंतर प्रयास और अनुशासन से सबसे कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

