कल यानी 21 सितंबर से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। यात्री किराए में वृद्धि की मांग को लेकर बस ऑपरेटर संघ ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। हड़ताल के चलते जिले के भीतर और अंतर-जिला मार्गों पर दौड़ने वाली 300 से अधिक बसों के पहिए पूरी तरह थम जाएंगे। इस फैसले से रोजाना सफर करने वाले आम यात्रियों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, कॉलेज-स्कूल के विद्यार्थियों और ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आने वाले लोगों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित होगा।
लागत बढ़ी पर किराया नहीं: आर्थिक तंगी का हवाला दे रहे ऑपरेटर
बस संचालक संघ का कहना है कि वे लंबे समय से शासन-प्रशासन के सामने किराया बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है:ऑपरेटरों के मुताबिक डीजल के दाम, गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स, बीमा प्रीमियम, परमिट शुल्क, टैक्स और ड्राइवर-कंडक्टरों के वेतन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। मौजूदा किराए में बसों को चलाना अब आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया है। लंबे समय से यात्री किराए में अपेक्षित संशोधन नहीं होने के कारण बस मालिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रमुख बस स्टैंडों से प्रतिदिन 2000 से अधिक बसों का संचालन ग्रामीण और अंतर्राज्यीय रूटों पर होता है। हड़ताल के कारण इन सभी मार्गों पर सेवाएं ठप रहने की आशंका है:शहर आने-जाने के लिए पूरी तरह यात्री बसों पर निर्भर ग्रामीण आबादी को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।बसों के बंद होने से ऑटो, टैक्सी और दोपहिया वाहनों पर निर्भरता बढ़ेगी, जिसका फायदा उठाकर मनमाना किराया वसूले जाने की भी आशंका है।
मांगें पूरी नहीं होने पर आर-पार की लड़ाई की चेतावनी
बस ऑपरेटर संघ ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए यह कदम उठाना उनकी मजबूरी बन गया है। संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक शासन यात्री किराए में सम्मानजनक वृद्धि को लेकर लिखित आदेश या ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक यह चक्काजाम आंदोलन जारी रहेगा। यदि समय रहते प्रशासन ने मध्यस्थता कर समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।



