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विचारों को बहने दीजिए नई खोज की प्रतीक्षा नहीं बल्कि चिंतन की भीड़ और साहसिक प्रयोग ही सृजन की असली शक्ति है
यदि मानव इतिहास पर एक दृष्टि डालें तो स्पष्ट होता है कि किसी भी महान खोज या परिवर्तन की शुरुआत किसी एक अद्भुत विचार से नहीं हुई। परिवर्तन की नींव हमेशा असंख्य विचारों की हलचल से पड़ी है। विचार जन्म लेते हैं टकराते हैं टूटते हैं और फिर उन्हीं टूटे हुए टुकड़ों से कोई नया रास्ता बनता है। यही कारण है कि बिना विचारों के न नवाचार संभव है और न ही प्रगति।
अक्सर हम यह मान लेते हैं कि कोई बड़ा विचार अचानक किसी विशेष क्षण में प्रकट होता है। लेकिन वास्तविकता इसके ठीक उलट है। महान खोजें किसी एक चमकदार विचार की देन नहीं होतीं बल्कि अनगिनत छोटे बड़े विचारों की भीड़ से छनकर सामने आती हैं। जो लोग सचमुच कुछ नया करना चाहते हैं वे अच्छे विचारों की प्रतीक्षा नहीं करते बल्कि विचारों को जन्म देने की प्रक्रिया में स्वयं को झोंक देते हैं।
रचनात्मक मन कभी खाली नहीं होता। वह लगातार प्रश्न करता है कल्पना करता है और संभावनाओं से खेलता है। ऐसे लोग विचारों से डरते नहीं बल्कि उन्हें आमंत्रित करते हैं। वे जानते हैं कि हर विचार उपयोगी नहीं होगा लेकिन यही तो रचनात्मकता की शर्त है। अधिकांश विचार अधूरे होंगे कुछ गलत होंगे और कई तो पूरी तरह अनुपयोगी भी निकलेंगे। लेकिन यही असफल विचार भविष्य की किसी बड़ी सफलता की नींव रखते हैं।
इतिहास गवाह है कि हर क्रांतिकारी खोज के पीछे असफल प्रयासों की एक लंबी श्रृंखला छिपी होती है। यदि थॉमस एडिसन एक असफल प्रयोग के बाद रुक जाते तो शायद आज दुनिया अंधेरे में होती। यदि वैज्ञानिक केवल सही विचार की प्रतीक्षा करते रहते तो विज्ञान की यात्रा कभी आगे नहीं बढ़ती। इसलिए विचारों की संख्या बढ़ाना ही वास्तव में अच्छे विचार तक पहुंचने का सबसे प्रभावी रास्ता है।
हालांकि विचारों की अधिकता के साथ एक और गुण का होना भी उतना ही आवश्यक है और वह है विवेक। विवेक कोई जादुई शक्ति नहीं बल्कि अनुभव अभ्यास और गहरी समझ से विकसित होने वाली वह क्षमता है जो हमें सही और गलत के बीच फर्क करना सिखाती है। यही विवेक तय करता है कि कौन सा विचार आगे बढ़ाने योग्य है और कौन सा केवल सीख देकर विदा लेने आया है।
सफल व्यक्ति वही होता है जो समय रहते कमजोर विचारों को छोड़ देता है और सार्थक विचारों पर अपना ध्यान केंद्रित करता है। लेकिन यह निर्णय भी तभी संभव है जब व्यक्ति के पास विचारों का भंडार हो। जो सोचता ही नहीं वह चयन भी नहीं कर सकता।
नए विचारों को आजमाने से कभी डरना नहीं चाहिए। चाहे वे अधूरे लगें या समाज की समझ से परे हों। हर विचार का अपना महत्व होता है क्योंकि वही अगले बेहतर विचार का आधार बन सकता है। रचनात्मकता केवल कल्पना नहीं है और सफलता केवल परिश्रम नहीं। इन दोनों को जोड़ने वाला सेतु विवेक है।
आज के तेज़ रफ्तार जीवन में सबसे बड़ा खतरा यह है कि हम सोचने से पहले ही निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं। जबकि आवश्यकता इस बात की है कि हम विचारों को बहने दें। उन्हें रोकें नहीं उन्हें परखें और उनसे संवाद करें। जब विचारों की धारा मुक्त होती है तभी समाज विज्ञान कला और जीवन स्वयं आगे बढ़ता है।
नई खोजों के लिए इंतजार मत कीजिए। खोज तब होती है जब विचारों की भीड़ होती है। साहसिक प्रयोग कीजिए। असफल होने से मत डरिए। क्योंकि असफल विचार ही भविष्य की सफलता का पहला कदम होता है।
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