जशपुर
जिले की सड़कों पर बीते तीन वर्षों में 907 लोगों की मौत केवल आंकड़ा नहीं है बल्कि 907 परिवारों के जीवन में स्थायी खालीपन की कहानी है। हर साल बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं अब प्रशासन के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के दौरान जशपुर प्रशासन ने हादसों पर रोक के लिए ट्रिपल ई फार्मूले को अपनाने का दावा किया है लेकिन जमीनी सच्चाई इस सोच से कई कदम पीछे नजर आती है।
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क्या है ट्रिपल ई
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में प्रशासन सड़क सुरक्षा को लेकर इंजीनियरिंग एजुकेशन और इन्फोर्समेंट के सिद्धांत पर काम कर रहा है। उद्देश्य यह है कि सड़कों की तकनीकी खामियों को दूर किया जाए लोगों को नियमों के प्रति जागरूक किया जाए और कानून का सख्ती से पालन कराया जाए। यह मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी माना जाता है और अब इसे जशपुर में लागू किया जा रहा है।
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इंजीनियरिंग पर जोर लेकिन चुनौतियां बरकरार
प्रशासन द्वारा रेंचुआ घाटी जैसे संवेदनशील इलाकों में गार्डवॉल निर्माण ईला चौक जैसे ब्लैक स्पॉट पर संकेतक लगाने और खतरनाक मोड़ों को चौड़ा करने का कार्य किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई को तकनीकी सुधार के निर्देश दिए गए हैं। बावजूद इसके कई ग्रामीण और घाटी क्षेत्र अब भी अंधेरे और संकरे रास्तों से जूझ रहे हैं जहां छोटी सी चूक जानलेवा साबित हो रही है।
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जागरूकता की कोशिश और धीमी मानसिकता
स्कूल कॉलेज और ग्रामीण बाजारों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। हेलमेट सीट बेल्ट और यातायात नियमों को लेकर समझाइश दी जा रही है। मगर हकीकत यह है कि नशे में वाहन चलाना खासकर ग्रामीण इलाकों में अब भी आम बात है। कच्ची शराब पीकर बाइक और ट्रैक्टर दौड़ाना एक खतरनाक आदत बन चुकी है। सड़कें सुधर रही हैं लेकिन सोच में सुधार की रफ्तार बेहद धीमी है।
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सख्ती सीमित इलाकों तक
पुलिस द्वारा चालानी कार्रवाई तेज की गई है। ओवरस्पीडिंग बिना लाइसेंस और बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई हो रही है। लेकिन यह सख्ती मुख्य चौराहों और शहरी इलाकों तक सीमित दिखती है। अंदरूनी गांव रास्तों और घाटियों में नियमों की अनदेखी खुलेआम जारी है।
आंकड़े जो डराते हैं
प्रशासनिक दावों के बीच आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं। वर्ष 2023 में जहां 256 लोगों की मौत हुई थी वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 310 तक पहुंच गई। बीते तीन वर्षों में 1272 सड़क हादसे यह साबित करते हैं कि जशपुर की सड़कें अब भी जानलेवा बनी हुई हैं।
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प्रशासन की सोच और जनता की उम्मीद
प्रशासन मानता है कि तकनीकी सुधार और सख्त कार्रवाई से ही हालात बदलेंगे। एसएसपी शशि मोहन सिंह के अनुसार सभी एसडीएम और एसडीओपी को ब्लैक स्पॉट सुधार की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं आम लोगों का कहना है कि केवल कागजी चिन्हांकन और चालान से मौतें नहीं रुकेंगी। घाटियों में रोशनी भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार और ढाबों पर बिकने वाली अवैध शराब पर सख्त नियंत्रण जरूरी है।
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ट्रिपल ई फार्मूला एक मजबूत सोच है लेकिन जब तक यह पूरी ईमानदारी के साथ हर सड़क हर गांव और हर घाटी तक नहीं पहुंचेगा तब तक जशपुर की सड़कों पर मौत का यह तांडव थमता नजर नहीं आएगा। सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज की सामूहिक चेतना का विषय है।
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