नई दिल्ली:
देश की सड़कों पर बिना वैध ‘थर्ड पार्टी’ बीमा के दौड़ रहे करोड़ों वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए शीर्ष अदालत ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह एक प्रायोगिक (पायलट) परियोजना तैयार करे, जिसके तहत बिना वैध बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से रोका जा सके।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने यह फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के उन प्रावधानों का पर्याप्त पालन नहीं हो रहा है, जिनके तहत सभी वाहनों के लिए ‘थर्ड पार्टी’ जोखिम को कवर करने वाला वैध बीमा होना अनिवार्य है।
इंदिरा गांधी कृषि विवि: B.Sc कृषि स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए काउंसलिंग शुरू, 18 अगस्त को होगा सीट और कॉलेज आवंटन
देश के 56% वाहन बिना बीमा के: रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वित्त संबंधी स्थायी समिति की 2024-25 की रिपोर्ट का हवाला दिया। आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल 30.48 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहन बिना बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं। यानी लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना किसी वैध बीमा सुरक्षा के दौड़ रहे हैं, जो कि बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है।
अदालत ने टिप्पणी की कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर वित्तीय सुरक्षा दिलाना है। लेकिन जब वाहन का बीमा ही नहीं होता, तो दुर्घटना में जान गंवाने वाले या गंभीर रूप से घायल होने वाले पीड़ितों और उनके परिजनों को मुआवजा पाने के लिए सालों तक लंबी और जटिल कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।
जुलाई 2026 से केंद्रीय कर्मचारियों को 63% DA मिलना तय! राज्य कर्मचारियों को जनवरी से अटके 2% का इंतजार
पेट्रोल पंपों पर कैसे लागू होगी व्यवस्था?
पीठ ने भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को आपस में विचार-विमर्श कर एक तंत्र विकसित करने को कहा है:
पेट्रोल पंपों से जुड़ाव: वाहनों में ईंधन भरवाने को उनके वैध बीमा रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा।
इंधन देने पर रोक: यदि किसी वाहन का बीमा समाप्त हो चुका है, तो जब तक नया बीमा नहीं कराया जाता, तब तक पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं दिया जाएगा।
दोहरा फायदा: कोर्ट के अनुसार, इससे एक तरफ तो बिना बीमा वाले वाहनों की तुरंत पहचान हो सकेगी, वहीं दूसरी तरफ लोग चालान और परेशानी से बचने के लिए समय पर बीमा कराने के लिए प्रेरित होंगे। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी इस व्यवस्था पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई है।
Air India Flight Turbulence: हवा में 300 फीट नीचे आया विमान, 10 यात्री समेत 14 लोग घायल, जानिए यात्रा के दौरान कैसे रहें सुरक्षित
नए वाहनों के लिए थर्ड पार्टी बीमा की अवधि बढ़ी
सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में दिए अपने पुराने आदेश में संशोधन करते हुए नए वाहनों के लिए अनिवार्य बीमा अवधि को 1-1 वर्ष और बढ़ाने का निर्देश दिया है:
चारपहिया वाहन (4-Wheelers): अब नए चारपहिया वाहनों के पंजीकरण के समय 3 वर्ष के बजाय 4 वर्ष का ‘थर्ड पार्टी’ बीमा अनिवार्य होगा।
दोपहिया वाहन (2-Wheelers): नए दोपहिया वाहनों के लिए यह अवधि 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष कर दी गई है।
अदालत ने बीमा नियामक IRDAI को इस संबंध में तुरंत नए निर्देश जारी करने को कहा है ताकि नए वाहन खरीदारों को लंबे समय तक बीमा सुरक्षा मिल सके।
FSSAI का डाबर पर बड़ा एक्शन, ‘100% Pure’ दावों पर रोक; शहद-घी समेत इन प्रोडक्ट्स पर उठे सवाल
टोल प्लाजा पर ANPR कैमरे और ऑटोमैटिक ई-चालान
हाईवे और टोल प्लाजा पर लंबी कतारों को खत्म करने और निगरानी बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एएनपीआर (ANPR – स्वचालित नंबर प्लेट पहचान) कैमरों का उपयोग करने का निर्देश दिया है:
स्वचालित पहचान: टोल प्लाजा से गुजरते ही कैमरे वाहन के नंबर प्लेट को स्कैन कर लेंगे।
‘वाहन’ पोर्टल से इंटीग्रेशन: कैमरों को बीमा सूचना ब्यूरो और केंद्र सरकार के ‘वाहन’ (VAAHAN) पोर्टल से जोड़ा जाएगा।
स्वत: ई-चालान: यदि कैमरे में रिकॉर्ड हुआ वाहन बिना बीमा का पाया जाता है, तो सिस्टम तुरंत उसका ई-चालान काट देगा।
साथ ही, ट्रैफिक पुलिस के लिए हैंडहेल्ड डिवाइस या विशेष मोबाइल ऐप उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पुलिसकर्मी मौके पर ही किसी भी गाड़ी के बीमा की स्थिति को रियल-टाइम में जांच सकें।
जनगणना का दूसरा चरण 17 अगस्त से: जाति से लेकर माता-पिता के जन्म स्थान तक, पूछे जाएंगे ये बड़े सवाल
बीमा पॉलिसी में ज्यादा विकल्प देने के निर्देश
अदालत ने IRDAI को निर्देश दिया कि वह आम गाड़ी मालिकों के लिए केवल बेसिक ‘थर्ड पार्टी’ बीमा ही नहीं, बल्कि ऐड-ऑन कवर, व्यक्तिगत दुर्घटना (Personal Accident) कवर और स्वयं के वाहन की क्षति (Own Damage) कवर जैसी विभिन्न पॉलिसियों के विकल्प आसान और किफायती दरों पर उपलब्ध कराए।
सुप्रीम कोर्ट के इन सख्त और व्यापक फैसलों का मुख्य उद्देश्य देश की सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाना और दुर्घटना पीड़ितों को लंबी कानूनी प्रक्रिया के बिना समय पर पर्याप्त मुआवजा दिलाना है।

