रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने विधानसभा में प्रदेश की दो महत्वपूर्ण प्रणालियों—सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और आंगनबाड़ी सेवाओं—को लेकर विस्तृत आंकड़े पेश किए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि राज्य में जमीनी स्तर पर सेवाओं के संचालन में महिलाओं की भूमिका निर्णायक हो गई है।
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राशन दुकानों में तकनीक और महिला शक्ति का संगम
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश में कुल 14,085 उचित मूल्य की दुकानें संचालित हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने इन सभी दुकानों में शत-प्रतिशत ई-पॉस (e-POS) मशीनें स्थापित कर दी हैं। सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि इनमें से 5,799 राशन दुकानों का संचालन सीधे तौर पर महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय और सुविधाओं पर स्पष्टता
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दूसरी ओर, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रदेश की आंगनबाड़ी व्यवस्था का ब्यौरा प्रस्तुत किया। राज्य में इस समय 1,668 पर्यवेक्षक, 52,264 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 51,497 सहायिकाएं अपनी सेवाएं दे रही हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि 11 मई 2023 को किए गए संशोधन के बाद, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 10,000 रुपये और सहायिकाओं को 5,000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जा रहा है।
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इस मानदेय में राज्य सरकार का बड़ा हिस्सा शामिल है। कार्यकर्ताओं के 10,000 रुपये में से 7,300 रुपये और सहायिकाओं के 5,000 रुपये में से 3,650 रुपये का वहन राज्य सरकार कर रही है। हालांकि, विभाग ने यह भी स्वीकार किया कि फिलहाल उन्हें सुरक्षा सामग्री के रूप में मेडिकल किट उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, लेकिन डिजिटल कामकाज के लिए स्मार्टफोन और अन्य कार्य संसाधन मुहैया कराए जा रहे हैं।
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प्रशिक्षण से सशक्त हो रही हैं कार्यकर्ता
सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को केवल मानदेय ही नहीं, बल्कि पोषण ट्रैकर ऐप के संचालन, वजन त्योहार और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख जैसे आधुनिक विषयों पर नियमित प्रशिक्षण भी दे रही है। मानदेय वृद्धि की मांगों को लेकर सरकार ने बताया कि कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की मांगों को केंद्र सरकार के समक्ष विचारार्थ भेजा गया है।
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इन दोनों रिपोर्टों से यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक सेवाओं के वितरण और बाल विकास की कमान काफी हद तक महिलाओं के सुरक्षित हाथों में है, जिसे सरकार तकनीक और आर्थिक सहयोग से और मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
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