Year Ender 2025: आस्था, जश्न और सफर सब पड़े भारी, दर्द और त्रासदियों का साल रहा 2025
साल 2025 भारतीय राजनीति और सामाजिक बहसों के लिहाज से बेहद उथल-पुथल भरा रहा। पूरे साल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। संसद से लेकर सड़क तक कई मुद्दों पर राजनीति गरमाई रही। वक्फ संशोधन कानून, एसआईआर, ऑपरेशन सिंदूर, लेह हिंसा और वंदे मातरम जैसे विषयों ने देशभर में तीखी बहस छेड़ी। इन मुद्दों ने न सिर्फ सियासी माहौल को गर्म रखा, बल्कि आम जनता को भी लंबे समय तक प्रभावित किया।
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साल की शुरुआत से ही वक्फ (संशोधन) अधिनियम चर्चा में रहा। सरकार ने इसे वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने और दुरुपयोग रोकने के उद्देश्य से पेश किया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे ‘सबका साथ, सबका विकास’ की दिशा में अहम कदम बताया। हालांकि विपक्ष ने इसे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वायत्तता पर हमला करार दिया। देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और कई मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध किया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएं दायर की गईं। यह मुद्दा पूरे साल राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहा।
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देश को झकझोर दिया। इस हमले में 25 पर्यटकों की जान चली गई। इसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया और पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की। इस दौरान दोनों देशों के बीच ड्रोन गतिविधियां भी देखी गईं। भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने और व्यापारिक संबंधों पर रोक लगाने जैसे कड़े फैसले लिए। हालांकि विपक्ष ने सरकार के साथ खड़े होने के बावजूद यह आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में सीजफायर किया गया। यह मुद्दा साल का सबसे बड़ा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम बना।
लद्दाख में लेह हिंसा और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी भी बड़ा मुद्दा रही। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए, जो हिंसक हो गए। इस दौरान चार लोगों की मौत हो गई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा। सरकार ने हिंसा भड़काने के आरोप में सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश बताया, जबकि सरकार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने की दलील दी।
साल 2025 में सबसे ज्यादा राजनीतिक बहस जिस मुद्दे पर हुई, वह था एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष ने बड़े पैमाने पर विरोध किया। विपक्ष का आरोप था कि इसके जरिए गरीब, दलित और अल्पसंख्यक वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं। संसद में इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। हालांकि सरकार ने इसे चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की कवायद बताया। अंततः शीतकालीन सत्र में चुनाव सुधारों पर चर्चा हुई, लेकिन विवाद थमता नजर नहीं आया।
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साल के अंत में वंदे मातरम भी राजनीतिक बहस का बड़ा कारण बना। संसद में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आज़ादी के बाद इसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की गई। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार आगामी चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही है। इस बहस ने एक बार फिर राष्ट्रवाद और इतिहास की व्याख्या को लेकर नई बहस छेड़ दी। कुल मिलाकर साल 2025 राजनीति, राष्ट्रवाद, कानून और सामाजिक मुद्दों के टकराव का साल रहा। वक्फ से लेकर वंदे मातरम तक हर बड़ा मुद्दा सियासी संघर्ष का केंद्र बना रहा। यह साल बताकर गया कि आने वाले समय में भी देश की राजनीति में वैचारिक टकराव और बहसें और तेज होंगी।
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