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CGNOW RIPOERT 2025
साल 2025 अब अपने आखिरी दौर में पहुंच चुका है और देश नए साल 2026 की दहलीज पर खड़ा है, लेकिन बीतता हुआ यह वर्ष भारत के लिए सिर्फ समय का एक पड़ाव नहीं रहा। यह साल अपने पीछे दर्द, मातम और ऐसे जख्म छोड़कर जा रहा है, जिन्हें भरने में बरसों लग सकते हैं। 2025 ने देश को बार-बार यह एहसास कराया कि एक पल की लापरवाही, अव्यवस्था या भीड़ का गलत प्रबंधन किस तरह सैकड़ों परिवारों की दुनिया उजाड़ सकता है। इस वर्ष देश के अलग-अलग हिस्सों में घटित कई बड़ी घटनाओं ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे राष्ट्र को भीतर तक हिला कर रख दिया।
12 जून की दोपहर अहमदाबाद से आई खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान उड़ान भरने के एक मिनट से भी कम समय में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह ऐसा मंजर था, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। विमान में 12 क्रू मेंबर सहित कुल 242 लोग सवार थे। हादसा इतना भीषण था कि विमान में मौजूद 241 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई। सिर्फ एक यात्री की जान बच पाई, जिसे लोग चमत्कार मान रहे हैं। लेकिन त्रासदी यहीं खत्म नहीं हुई। विमान जिस मेडिकल कॉलेज की इमारत पर गिरा, वहां मौजूद 29 लोगों की भी जान चली गई। कुछ ही मिनटों में हंसते-खेलते परिवार हमेशा के लिए उजड़ गए। देशभर में शोक की लहर दौड़ गई और विमानन सुरक्षा, तकनीकी खामियों और आपात प्रतिक्रिया व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे।
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इसके कुछ ही समय बाद आस्था का सबसे बड़ा पर्व भी 2025 में दर्द की तस्वीर बन गया। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान संगम तट पर अमृत स्नान से पहले अचानक भगदड़ मच गई। रात करीब एक बजे संगम नोज क्षेत्र में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच अफरा-तफरी फैल गई। लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए और चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा। इस भयावह हादसे में 30 से ज्यादा लोगों की जान चली गई, जबकि 36 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जिन श्रद्धालुओं ने पुण्य की कामना के साथ संगम की ओर कदम बढ़ाए थे, उनके परिवारों को लौटते समय केवल मौत की खबर मिली। इस घटना ने भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों को कठघरे में खड़ा कर दिया।
महाकुंभ से जुड़ी एक और त्रासदी देश की राजधानी दिल्ली में सामने आई। 15 फरवरी को महाकुंभ जाने वाली ट्रेनों में भारी देरी के कारण नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ गई। प्लेटफॉर्म पर जगह कम थी और व्यवस्था बिखरी हुई थी। इसी बीच भीड़ बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में 18 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 14 महिलाएं और 3 बच्चे शामिल थे। 25 से अधिक लोग घायल हुए। यह घटना एक बार फिर बताती है कि धार्मिक यात्राओं के दौरान परिवहन और यात्री प्रबंधन में की गई छोटी सी चूक भी कितनी बड़ी मानवीय त्रासदी में बदल सकती है।
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साल 2025 के अंतिम महीनों में गोवा से आई एक खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया। 6 दिसंबर की रात एक नाइट क्लब में जश्न का माहौल था, संगीत बज रहा था और लोग खुशियां मना रहे थे। तभी अचानक सिलेंडर ब्लास्ट हुआ और देखते ही देखते भीषण आग फैल गई। आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। इस भयावह अग्निकांड में 25 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हो गए। जिन चेहरों पर कुछ देर पहले मुस्कान थी, वे हमेशा के लिए खामोश हो गए। इस हादसे ने मनोरंजन स्थलों पर सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया।
खेल के मैदान से जुड़ी एक घटना ने भी 2025 को और दर्दनाक बना दिया। 4 जून को आईपीएल में पहली बार चैंपियन बनी रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की जीत का जश्न पूरे शहर में मनाया जा रहा था। चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर विजेता खिलाड़ियों के स्वागत के लिए भारी भीड़ जमा हो गई। उत्साह और उमंग के बीच अचानक हालात बेकाबू हो गए और भगदड़ मच गई। इस घटना में 11 लोगों की मौत हो गई और 33 लोग घायल हो गए। जो दिन इतिहास में खुशी के रूप में दर्ज होना था, वह कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला घाव बन गया।
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इन सभी घटनाओं ने मिलकर साल 2025 को एक ऐसे वर्ष के रूप में दर्ज कर दिया, जिसने बार-बार सिस्टम की कमजोरियों को उजागर किया। चाहे विमानन सुरक्षा हो, धार्मिक आयोजन, रेलवे स्टेशन, नाइट क्लब या खेल आयोजन, हर जगह एक ही सवाल गूंजता रहा कि क्या हमारी व्यवस्थाएं भीड़ और आपात हालात से निपटने के लिए पर्याप्त हैं। हर हादसे के बाद जांच और आश्वासन तो मिले, लेकिन सवाल यह भी रहा कि क्या उन सबक़ों को वास्तव में लागू किया गया।
जब देश 2026 की ओर कदम बढ़ा रहा है, तब 2025 की ये त्रासदियां सिर्फ बीती हुई खबरें नहीं हैं। ये चेतावनी हैं, सबक हैं और उन सैकड़ों परिवारों की दर्दभरी कहानियां हैं, जिनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। नए साल की शुरुआत उम्मीद के साथ होनी चाहिए, लेकिन उन जख्मों को याद रखते हुए, ताकि आने वाले वर्षों में किसी भी खुशी, आस्था या जश्न की कीमत फिर कभी इंसानी जानों से न चुकानी पड़े।
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