साल 2025 भारतीय रेलवे के लिए बेहद दर्दनाक और चुनौतीपूर्ण रहा। इस वर्ष हुए कई बड़े रेल हादसों ने न सिर्फ सैकड़ों परिवारों को उजाड़ा, बल्कि रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जनवरी से लेकर नवंबर तक देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए हादसों ने यह साफ कर दिया कि यात्रियों की सुरक्षा अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
साल की शुरुआत ही एक भयावह घटना से हुई। जनवरी महीने में महाराष्ट्र के जलगांव में पुष्पक एक्सप्रेस में आग लगने की अफवाह फैलते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। डर के कारण कई यात्री ट्रेन से उतरकर दूसरे ट्रैक पर चले गए। इसी दौरान सामने से आ रही ट्रेन की चपेट में आने से कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे ने अफवाहों और रेलवे प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
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इसके बाद फरवरी में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर महाकुंभ जाने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दो ट्रेनों के देरी से चलने के कारण प्लेटफॉर्म पर अचानक भीड़ बढ़ गई और भगदड़ मच गई। हालांकि इस घटना में समय रहते हालात संभाल लिए गए, लेकिन यह साफ हो गया कि बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन अब भी कमजोर है।
मई महीने में तमिलनाडु के अरक्कोनम स्टेशन के पास एक बड़ा रेल हादसा हुआ, जहां पैसेंजर ट्रेन और मालगाड़ी आमने-सामने टकरा गईं। इस दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद रेलवे की सिग्नलिंग प्रणाली और सतर्कता पर सवाल उठे।
अगस्त में बिहार के मुजफ्फरपुर में एक और दर्दनाक हादसा सामने आया। रेलवे क्रॉसिंग पर एक मिनी बस ट्रेन की चपेट में आ गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस के परखच्चे उड़ गए और सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर करता है।
नवंबर महीने में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बड़ा रेल हादसा हुआ। MEMU पैसेंजर ट्रेन ने सिग्नल ओवरशूट कर आगे खड़ी मालगाड़ी को टक्कर मार दी। इस हादसे में 11 यात्रियों की जान चली गई और कई लोग घायल हुए। ट्रेन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यह दुर्घटना साल की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक मानी गई।
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इसी महीने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में हावड़ा से कालका जा रही ट्रेन की चपेट में आने से छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब श्रद्धालु रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे। इस घटना ने एक बार फिर रेलवे ट्रैक सुरक्षा और जागरूकता की कमी को उजागर किया।
साल 2025 में हुए इन हादसों ने साफ कर दिया कि भारतीय रेलवे को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े सुधारों की जरूरत है। आधुनिक सिग्नल सिस्टम, बेहतर ट्रैक निगरानी, भीड़ नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाना अब बेहद जरूरी हो गया है।
ये साल भारतीय रेलवे के इतिहास में एक चेतावनी के रूप में दर्ज रहेगा, जिसने यह संदेश दिया कि तकनीकी विकास के साथ-साथ सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना अब टाला नहीं जा सकता।
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