अब प्राइवेट स्कूलों में भी 5वीं-8वीं की ‘बोर्ड परीक्षा’; सरकारी केंद्रों पर बैठेंगे छात्र

नई दिल्ली: भारत सरकार का ‘स्किल इंडिया मिशन’ देश की कामकाजी आबादी को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करने में एक गेम-चेंजर साबित हुआ है। कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने राज्यसभा में महत्वपूर्ण आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पिछले कुछ वर्षों में व्यावसायिक रूप से प्रशिक्षित युवाओं (15-29 आयु वर्ग) की संख्या में अभूतपूर्व उछाल आया है। साल 2017-18 में जहाँ केवल 7.1 प्रतिशत युवा प्रशिक्षित थे, वहीं 2023-24 तक यह आंकड़ा बढ़कर 26.1 प्रतिशत हो गया है, जो देश के युवाओं की बदलती दक्षता और रोजगार क्षमता को दर्शाता है।

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इस मिशन की सफलता की रीढ़ प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) रही है, जिसने दिसंबर 2025 तक 1.64 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित और प्रमाणित किया है। इसी दिशा में ‘जन शिक्षण संस्थान’ (JSS) ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके माध्यम से 34 लाख से अधिक व्यक्तियों को हुनरमंद बनाया गया है, जिनमें 79 प्रतिशत महिलाएं और 50 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण आबादी शामिल है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) के नेटवर्क का भी विस्तार हुआ है, जिनकी संख्या 2014 के 9,776 से बढ़कर अब 14,688 हो गई है। आने वाले पांच वर्षों के लिए सरकार ने 60,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली ‘PM सेतु’ योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत हब-एंड-स्पोक मॉडल के जरिए 1,000 ITI को उन्नत बनाया जाएगा।

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रोजगार और उद्यमिता पर इन योजनाओं का सीधा प्रभाव दिखाई दे रहा है। नीति आयोग और अन्य स्वतंत्र मूल्यांकन रिपोर्टों के अनुसार, कौशल विकास कार्यक्रमों के कारण लाभार्थियों की घरेलू आय लगभग दोगुनी हो गई है और 94 प्रतिशत नियोक्ताओं ने प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी देने में गहरी रुचि दिखाई है। शिक्षुता (Apprenticeship) के क्षेत्र में भी ‘राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना’ (NAPS) के तहत 51 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को उद्योगों से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें सीधे कार्यस्थल पर अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला है। सरकार ने अब प्रशिक्षणार्थियों के लिए ‘डीबीटी’ (DBT) पद्धति अपनाई है ताकि वित्तीय लाभ सीधे उनके बैंक खातों में पहुँच सके।

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भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस और मशीन लर्निंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है। अब तक 5.10 लाख से अधिक युवाओं को एआई और उद्योग 4.0 से संबंधित उच्च-तकनीकी भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा चुका है। ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ (SIDH) जैसे डिजिटल टूल्स के माध्यम से अब छात्र न केवल कौशल सीख रहे हैं, बल्कि अपने लिए बेहतर करियर पथ और रोजगार के अवसरों की तलाश भी कर रहे हैं। सामूहिक रूप से ये प्रयास ‘आत्मनिर्भर भारत’ की संकल्पना को धरातल पर उतारने और युवाओं को उद्यमी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

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