नई दिल्ली: देश में बढ़ते Cyber Crime और Digital Arrest Scam के बीच गुजरात पुलिस ने एक कथित बड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का खुलासा किया है। गांधीनगर स्थित साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCE) और CID Crime की टीम ने असम के बारपेटा से 25 वर्षीय रफीकुल आलम को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी का कनेक्शन देशभर में दर्ज 1,090 साइबर अपराध मामलों और करीब ₹1,071.5 करोड़ के संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क से सामने आया है। जांच में यह भी पता चला कि ठगी की रकम को पकड़ से बचाने के लिए बेहद तेजी से अलग-अलग बैंक खातों में भेजा जाता था और बाद में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेश स्थित नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था।
1,754 बैंक खातों में एक घंटे के अंदर ट्रांसफर
पुलिस के अनुसार, इस कथित Cyber Fraud Network में रकम को छिपाने के लिए लेयरिंग का इस्तेमाल किया जाता था। पीड़ितों से प्राप्त रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर करीब 1,754 बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इस प्रक्रिया का उद्देश्य पैसों के मूल स्रोत को छिपाना और जांच एजेंसियों के लिए ट्रांजैक्शन ट्रेल को जटिल बनाना था।
जांच में सामने आए प्रमुख तथ्य:
- 1,090 साइबर अपराध मामलों से कथित लिंक
- ₹1,071.5 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन का नेटवर्क
- करीब 1 घंटे में 1,754 बैंक खातों में रकम ट्रांसफर
- फोन से 23 क्रिप्टो वॉलेट मिलने का दावा
- करीब ₹16 करोड़ के क्रिप्टो लेन-देन के सबूत
- विदेशी साइबर नेटवर्क से कनेक्शन की जांच
Digital Arrest Scam में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल
जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी नेटवर्क कथित तौर पर लोगों को डराने के लिए Digital Arrest Scam का सहारा लेता था। पीड़ितों को पुलिस या सुप्रीम कोर्ट जैसे संस्थानों के नाम पर फर्जी नोटिस और दस्तावेज भेजकर कार्रवाई का डर दिखाया जाता था। इसके बाद वीडियो कॉल या अन्य डिजिटल माध्यम से उन्हें कथित तौर पर लंबे समय तक निगरानी में रखने और पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था।
एक बुजुर्ग नागरिक से जुड़ी शिकायत की जांच के दौरान पुलिस को इस नेटवर्क का सुराग मिला। कार्रवाई के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे 10 कथित डिजिटल अरेस्ट मामलों में समय रहते वित्तीय नुकसान रोकने में मदद मिली।
चीन कनेक्शन और 23 Crypto Wallet की जांच
पुलिस के अनुसार, आरोपी के मोबाइल से 23 Crypto Wallet मिले हैं। जांच में लगभग ₹16 करोड़ के लेन-देन के संकेत मिलने की बात कही गई है। अधिकारियों को शक है कि ठगी की रकम को पहले बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था और फिर क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशी साइबर नेटवर्क तक भेजा जाता था।
आरोपी तक पहुंचने के लिए पुलिस टीम ने बारपेटा में करीब तीन दिन तक गुप्त निगरानी की। इसके बाद कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार किया गया। अब जांच एजेंसियां कथित Chinese Cyber Crime Network, अन्य सहयोगियों और म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वालों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
यह मामला बताता है कि साइबर ठगी अब सिर्फ एक फोन कॉल तक सीमित नहीं रही, बल्कि बैंकिंग, क्रिप्टो और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा जटिल अपराध बन चुकी है। अनजान कॉल, फर्जी सरकारी नोटिस या वीडियो कॉल पर पैसे मांगने वाले किसी भी व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें और संदिग्ध साइबर फ्रॉड की सूचना संबंधित साइबर अपराध हेल्पलाइन या पुलिस को दें। ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए हमें Facebook और Instagram पर फॉलो करें।























