रायपुर:
राज्य में शिक्षक-कर्मचारी संगठनों और बेरोजगार प्राध्यापकों ने शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने और छात्र हित में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शासन-प्रशासन के उच्च अधिकारियों (शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री के सचिव और डीपीआई) को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।
कर्मचारी-अधिकारी स्थानांतरित संगठन के प्रांत अध्यक्ष व छत्तीसगढ़ शिक्षक कांग्रेस के संभाग उपाध्यक्ष लालबहादुर साहू के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि शिक्षकों की वरिष्ठता, पदोन्नति और विषयवार सेटअप में आ रही अड़चनों को जल्द से जल्द दूर किया जाए।
शिक्षकों की निम्न प्रमुख मांगें है
- स्थानांतरित शिक्षकों की वरिष्ठता और पदोन्नति लाभ: जीएडी (GAD) नियमों के तहत स्थानांतरित शिक्षकों की वरिष्ठता उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से जोड़ी जाए। बिना पदोन्नति के एक ही पद पर सेवा पूरी कर रहे 1998, 2005 और 2008 बैच के हजारों अनुभवी शिक्षकों को प्राचार्य, व्याख्याता, शिक्षक और प्रधानपाठक के पदों पर पदोन्नति का लाभ दिया जाए।
- हाई स्कूल सेटअप में आंशिक सुधार (विज्ञान विषय): छात्र हित और एससीईआरटी पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए हाई स्कूल के विज्ञान सेटअप में संशोधन किया जाए। सामाजिक विज्ञान की तर्ज पर भौतिक, रसायन और जीव विज्ञान (बायो) तीनों विषयों के अलग-अलग व्याख्याताओं की नई नियुक्ति और काउंसलिंग के माध्यम से पदोन्नति दी जाए, ताकि छात्र विषय विशेषज्ञ से शिक्षा प्राप्त कर सकें।
- लैब शिक्षकों के लिए गणित संकाय को प्राथमिकता: भविष्य में लैब शिक्षकों की नियुक्ति में गणित संकाय को प्राथमिकता दी जाए। चूंकि गणित संकाय के लैब शिक्षक विज्ञान और गणित दोनों का अध्यापन करा सकते हैं, इसलिए यह विद्यार्थियों के लिए अधिक उपयोगी होगा। साथ ही, वर्तमान में पदस्थ लैब शिक्षकों को केवल प्रयोगशाला कार्यों, टीचिंग मेथोडोलॉजी के प्रभावी उपयोग और उपकरणों के रखरखाव तक सीमित रखा जाए तथा उन्हें अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए।
- प्रायोगिक कार्यों की कालखंड में अनिवार्य गणना: विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रायोगिक कार्यों को अनिवार्य रूप से समय-सारणी (कालखंड) में शामिल किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि शाला प्रारंभ होने पर लैब शिक्षक समय पर प्रयोगशाला खोलकर उपस्थित रहें।
- विषयवार अध्यापन का कड़ाई से पालन: वर्ष 2008 के सेटअप नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए ताकि शिक्षक अपने मूल नियुक्त विषय (विषय विशेषज्ञता) का ही अध्यापन करें। कई संस्थाओं में कम कालखंड होने के बावजूद अन्य विषयों के अध्यापन का दबाव बनाया जाता है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रांत अध्यक्ष लालबहादुर साहू के साथ भुवनेश्वर प्रताप, डी.के. घोसले, महादेव साहू, बी.एल. मंगेशकर, सरोज यादव, ए.के. मंडावी समेत बड़ी संख्या में भौतिक-रसायन व्याख्याता, प्राचार्य और पीजी योग्यताधारी बेरोजगार युवा शामिल रहे। शिक्षकों ने उम्मीद जताई है कि सरकार इन छात्र-हितैषी और शिक्षक-हितैषी मांगों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए आवश्यक आदेश जारी करेगी।























