धान का कटोरा अब पोषण संकट में, छत्तीसगढ़ की मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बन की भारी कमी उजागर
जशपुर। कभी उपजाऊ खेती के लिए पहचाने जाने वाले जशपुर जिले की मिट्टी अब गंभीर पोषण संकट से गुजर रही है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2024–25 में कराए गए मृदा स्वास्थ्य परीक्षण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जिले से लिए गए मृदा नमूनों के विश्लेषण में पाया गया कि जशपुर की अधिकांश कृषि भूमि में नाइट्रोजन और फास्फोरस की भारी कमी है, जिससे आने वाले वर्षों में फसल उत्पादन पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार जशपुर जिले में करीब **89.93 प्रतिशत खेतों में फास्फोरस की भारी कमी** दर्ज की गई है, जबकि नाइट्रोजन की स्थिति भी बेहद चिंताजनक पाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी अधिक कमी सीधे तौर पर फसल की गुणवत्ता और पैदावार को प्रभावित करती है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राकेश वनवासी के अनुसार जशपुर की मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी का मुख्य कारण असंतुलित खेती और रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग है। उन्होंने बताया कि मिट्टी में कार्बन की कमी के कारण वह पोषक तत्वों को रोककर नहीं रख पा रही है। परिणामस्वरूप किसान जो खाद डालते हैं, वह या तो पानी के साथ बह जाती है या फिर धूप में उड़ जाती है।
डॉ. वनवासी ने बताया कि कार्बन मिट्टी की रीढ़ होता है। इसके बिना मिट्टी की संरचना कमजोर हो जाती है और फसल को पूरा पोषण नहीं मिल पाता। यही वजह है कि जशपुर में कई जगहों पर पौधे कमजोर, बौने और पीले दिखाई दे रहे हैं।
धान का कटोरा अब पोषण संकट में, छत्तीसगढ़ की मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बन की भारी कमी उजागर
**नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी से क्या हो रहा है नुकसान**
विशेषज्ञों के अनुसार नाइट्रोजन की कमी से पौधों की निचली पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, पौधे का विकास रुक जाता है और अनाज में प्रोटीन की मात्रा घट जाती है। वहीं फास्फोरस की कमी से जड़ों का विकास रुक जाता है, पौधे कमजोर हो जाते हैं और फसल देर से पकती है। इससे किसानों को कम उत्पादन और ज्यादा लागत का सामना करना पड़ रहा है।
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**अंधाधुंध खाद डालना भी बन रहा समस्या**
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि कई किसान बिना मृदा परीक्षण के ही यूरिया, डीएपी और पोटाश का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे मिट्टी का संतुलन और बिगड़ रहा है। कहीं पोषक तत्वों की कमी है तो कहीं अधिकता, जिससे फसल रोगों की चपेट में आ रही है।
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**विशेषज्ञों की सलाह**
विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे खेत में खाद डालने से पहले अनिवार्य रूप से मृदा परीक्षण कराएं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दिए गए सुझावों के अनुसार संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें। साथ ही जैविक खाद, गोबर खाद और हरी खाद के उपयोग से मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।
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**चेतावनी**
यदि समय रहते जशपुर जिले में मिट्टी की सेहत सुधारने पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में जिले की कृषि उत्पादन क्षमता पर गहरा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अब खेती को रासायनिक निर्भरता से निकालकर वैज्ञानिक और टिकाऊ पद्धति की ओर ले जाना ही एकमात्र समाधान है।

