सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, 2026 में 107 दिन रहेगा अवकाश

रायपुर। कभी देश का धान का कटोरा कहे जाने वाला छत्तीसगढ़ अब गंभीर कृषि संकट की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2024–25 में कराए गए मृदा स्वास्थ्य परीक्षण ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। प्रदेश के 33 जिलों से एकत्र किए गए 1 लाख 75 हजार 444 मृदा स्वास्थ्य कार्ड के विश्लेषण में यह खुलासा हुआ है कि 76.76 प्रतिशत नमूनों में नाइट्रोजन की मात्रा बेहद कम या लगभग शून्य पाई गई है, जबकि 51.8 प्रतिशत नमूनों में मिट्टी की जान माने जाने वाले ऑर्गेनिक कार्बन की भारी कमी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति आने वाले वर्षों में फसल उत्पादन, मिट्टी की उर्वरता और किसानों की आय के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राकेश वनवासी का कहना है कि मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी का सबसे बड़ा कारण असंतुलित खेती और रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध इस्तेमाल है। वहीं कार्बन की कमी से मिट्टी की संरचना पूरी तरह कमजोर हो चुकी है।

छत्तीसगढ़ में जल्द खुलेंगे 9 जिला साइबर थाने, जनवरी से शुरू होने की तैयारी, रेंज थानों का घटेगा बोझ

डॉ. वनवासी बताते हैं कि कार्बन मिट्टी में पोषक तत्वों को रोककर रखने का काम करता है। जब मिट्टी में कार्बन नहीं होता, तो वह छलनी जैसी बन जाती है। ऐसी स्थिति में किसान द्वारा डाला गया यूरिया या तो पानी के साथ बह जाता है या फिर धूप में गैस बनकर उड़ जाता है। इसका सीधा नुकसान फसल को होता है और किसान की लागत भी बेकार चली जाती है।

**नाइट्रोजन की सबसे ज्यादा कमी वाले जिले**

रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कई जिलों में नाइट्रोजन की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
सूरजपुर में 99.90 प्रतिशत,
सरगुजा में 99.81 प्रतिशत,
गरियाबंद में 99.74 प्रतिशत,
खैरागढ़–छुईखदान–गंडई में 99.60 प्रतिशत,
और बीजापुर में 98.56 प्रतिशत नमूनों में नाइट्रोजन की भारी कमी पाई गई है।

वहीं कुछ जिलों में नाइट्रोजन की अधिकता भी सामने आई है, जिनमें दुर्ग, बिलासपुर, धमतरी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और मुंगेली शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार नाइट्रोजन की अधिकता भी फसलों के लिए उतनी ही नुकसानदेह होती है जितनी उसकी कमी।
1 जनवरी से लागू हो सकता है 8वां वेतन आयोग, कर्मचारियों की सैलरी में होगा बड़ा इजाफा

**फास्फोरस की हालत भी खराब**

फास्फोरस की स्थिति भी राज्य में चिंताजनक बनी हुई है।
जशपुर में 89.93 प्रतिशत,
बलरामपुर में 75.31 प्रतिशत,
खैरागढ़–छुईखदान–गंडई में 65.10 प्रतिशत,
राजनांदगांव में 61.35 प्रतिशत
और मोहला–मानपुर में 51.40 प्रतिशत तक फास्फोरस की कमी दर्ज की गई है।
“Year Ender 2025 “मानव बनाम हाथी: “जंगल सूने, रास्ते खून से सने: झारखंड–छत्तीसगढ़ में हाथियों का अस्तित्व खतरे में”

फास्फोरस की कमी से पौधों की जड़ों का विकास रुक जाता है, पत्तियां बैंगनी होने लगती हैं और फसल देर से पकती है। वहीं इसकी अधिकता जिंक और आयरन जैसे जरूरी तत्वों को रोक देती है, जिससे फसल और कमजोर हो जाती है।

छत्तीसगढ़ में ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी, केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही करें भुगतान: परिवहन विभाग की अपील

**पोटाश की अधिकता भी बन रही खतरा**

रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू पोटाश को लेकर सामने आया है। कई जिलों में पोटाश खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है।
कबीरधाम में 99.04 प्रतिशत,
सूरजपुर में 91.05 प्रतिशत,
बेमेतरा में 89.16 प्रतिशत,
बलौदाबाजार में 76.03 प्रतिशत
और गरियाबंद में 75.27 प्रतिशत पोटाश अधिक पाया गया है।

SSC GD कांस्टेबल भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025

वहीं रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और सक्ती में पोटाश की कमी दर्ज की गई है। पोटाश असंतुलन से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और उत्पादन प्रभावित होता है।

**विशेषज्ञों की चेतावनी**

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बिना मृदा परीक्षण के उर्वरकों का प्रयोग खेती को लगातार कमजोर कर रहा है। जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद न केवल मिट्टी की सेहत खराब कर रही है, बल्कि किसानों की लागत भी बढ़ा रही है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित खाद का उपयोग ही खेती को बचा सकता है।विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते मिट्टी की सेहत सुधारने पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की कृषि उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट तय है। राज्य में सामने आए ये आंकड़े न सिर्फ किसानों बल्कि कृषि विभाग और नीति निर्धारकों के लिए भी गंभीर चेतावनी हैं। अब समय आ गया है कि खेती को रासायनिक निर्भरता से निकालकर वैज्ञानिक और संतुलित पद्धति की ओर ले जाया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ फिर से अपनी पहचान “धान का कटोरा” के रूप में बनाए रख सके।

एक जनवरी से बदलेगा ट्रेनों का समय, रेलवे ने जारी की नई समय सारिणी, 55 एक्सप्रेस और 8 पैसेंजर गाड़ियों के समय में बदलाव

Share.

About Us

CG NOW एक भरोसेमंद और निष्पक्ष न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो आपको छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया भर की ताज़ा, सटीक और तथ्य-आधारित खबरें प्रदान करता है। हमारी प्राथमिकता है जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना, ताकि वे हर पहलू से जागरूक और अपडेटेड रहें।

Contact Us

Syed Sameer Irfan
📞 Phone: 94255 20244
📧 Email: sameerirfan2009@gmail.com
📍 Office Address: 88A, Street 5 Vivekanand Nagar, Bhilai 490023
📧 Email Address: cgnow.in@gmail.com
📞 Phone Number: 94255 20244

© 2025 cgnow.in. Designed by Nimble Technology.

error: Content is protected !!
Exit mobile version