जशपुर जिले के कुनकुरी तहसील अंतर्गत लोधमा गाँव के रहने वाले मेधावी छात्र मो. जीशान ने इस कहावत को एक बार फिर सच साबित कर दिखाया है। एक साधारण ऑटो चालक के घर में जन्में 14 वर्षीय जीशान ने अपनी कड़ी मेहनत, असाधारण प्रतिभा और रचनात्मकता के बल पर न केवल अपनी अकादमिक क्षमता का लोहा मनवाया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
अभावों से परे बुलंद हौसले
जीशान का परिवार किसी धनाढ्य पृष्ठभूमि से ताल्लुक नहीं रखता। उनके पिता मो. समीद एक ऑटो चालक हैं, जो अपनी दिन-रात की कड़ी मेहनत से परिवार की गाड़ी आगे बढ़ाते हैं, और उनकी माता एक गृहिणी हैं।घर की आर्थिक परिस्थितियाँ भले ही सीमित थीं, लेकिन जीशान के सपनों की उड़ान पर इन तंगियों की कभी कोई परछाई नहीं पड़ी। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मदरसा मज़हरुल उलूम प्रा.शा. लोधमा से और आगे की पढ़ाई शा.पू.मा.शाला लोधमा से पूरी की। विपरीत परिस्थितियों में भी उनकी पठन-पाठन और सृजन के प्रति लगन अटूट रही।
8वीं बोर्ड में शानदार मुकाम
हाल ही में घोषित हुए 8वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा परिणामों में जीशान ने 75.20% अंक हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया। अपनी इस शानदार सफलता के दम पर उन्होंने विकासखंड और जिला स्तरीय सूची में तृतीय स्थान प्राप्त किया। गौ सेवा परीक्षा में भी ब्लॉक में टॉप किया और जिले में तीसरा स्थान पाया
उनकी इस उपलब्धि पर कलस्टर स्तर पर उन्हें प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लोधमा में कक्षा 9वीं में प्रवेश के दौरान शाला प्रवेशोत्सव के अवसर पर उन्हें विशेष सम्मान से अलंकृत किया गया।
राष्ट्रीय फलक पर चमका जशपुर का नाम: चकमक पत्रिका से खास जुड़ाव
जीशान की प्रतिभा केवल स्कूल के कमरों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी रचनात्मकता का दायरा राष्ट्रीय स्तर तक फैला है। बच्चों और किशोरों के बीच बेहद लोकप्रिय और प्रतिष्ठित हिंदी मासिक बाल विज्ञान एवं साहित्यिक पत्रिका चकमक’ (जो भोपाल की ‘एकलव्य’ संस्था द्वारा प्रकाशित होती है) में उनका नाम **तीन बार जनवरी, मार्च और जून 2026 में विभिन्न विषयों पर प्रकाशित हुआ है।
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एक ग्रामीण आंचल के छात्र की यह उपलब्धि पूरे जशपुर जिले के लिए गौरव का विषय है। ‘चकमक’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका में नाम छਪਣ और लगातार अपनी रचनाधर्मिता का प्रदर्शन करने पर ‘अजीत फाउंडेशन’ की ओर से लवनेश सर ने उन्हें पेन और डायरी भेंट कर उत्साहवर्धन किया, साथ ही जितनी बार उनका नाम छपा, वह पत्रिका उन्हें निःशुल्क भेंट की गई। यह इस बात का प्रमाण है कि सच्ची प्रतिभा छिपती नहीं, बल्कि खुद-ब-खुद रास्ता बना लेती है।
बुलंदियों को छूने की तैयारी
वर्तमान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लोधमा के 9वीं कक्षा के छात्र जीशान का सपना बड़ा है—वे बड़े होकर इंजीनियर बनना चाहते हैं। अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय वे अपने माता-पिता, शिक्षकों और उन सभी प्रेरणा स्रोतों को देते हैं जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया।
मो. जीशान की यह कहानी सिर्फ एक छात्र की सफलता की दास्तान नहीं है, बल्कि यह देश के उन हज़ारों ग्रामीण बच्चों के लिए एक मशाल है जो सीमित संसाधनों के बीच भी आसमान छूने का जज्बा रखते हैं। ऑटो के पहियों की गड़गड़ाहट के बीच पले-बढ़े इस होनहार बेटे ने साबित कर दिया है कि लगन सच्ची हो, तो मंजिल खुद-ब-खुद कदम चूमती है।

