केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा (MGNREGA) का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ करने का फैसला किया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।सरकार का कहना है कि यह बदलाव ग्रामीण रोजगार और विकास को नई दिशा देने के लिए किया जा रहा है।
मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्य काम की मांग कर सकते हैं। पंचायत स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। इसमें तालाब निर्माण, सड़क मरम्मत, नाला खुदाई, बागवानी, मिट्टी कार्य और अन्य सामुदायिक काम शामिल हैं। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार देने और आजीविका सुरक्षित करने का महत्वपूर्ण साधन है।
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क्यों बढ़ाए गए काम के दिन
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में महंगाई और नौकरी की कमी को देखते हुए काम के दिनों को 125 दिन तक बढ़ाया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि गांवों में रहने वाले परिवारों को अतिरिक्त काम मिले, जिससे उनकी आमदनी बढ़े और पलायन कम हो। काम के दिनों की बढ़ोतरी से स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी गति आएगी। योजना का नया नाम ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ महात्मा गांधी की ग्रामीण स्वावलंबन की विचारधारा को दर्शाने के लिए रखा गया है। सरकार चाहती है कि गांधी के ग्राम स्वराज के सिद्धांत को रोजगार से जोड़ा जाए। योजना की संरचना में कोई बदलाव नहीं होगा; सिर्फ नाम और काम के दिन बढ़ाए गए हैं।
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बिल अब संसद में पेश होगा
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद यह बिल अब संसद में पेश किया जाएगा। विधेयक पास होते ही नया नाम और बढ़े हुए काम के दिन आधिकारिक रूप से लागू हो जाएंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, अतिरिक्त 25 दिन का रोजगार ग्रामीण परिवारों को आर्थिक राहत देगा। इससे उनकी आय बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के अवसर मजबूत होंगे। मनरेगा के तहत काम मिलने से ग्रामीण क्षेत्र में नकदी का प्रवाह बढ़ता है, जिससे बाजार और छोटे व्यवसायों को भी लाभ होता है।
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