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नई दिल्ली: देशभर के हजारों सरकारी शिक्षकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। लंबे समय से शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी (TET) की अनिवार्यता को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब संसद में आरटीई (RTE) कानून में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया गया है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो सेवा में कार्यरत उन हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी जो पिछले कई वर्षों से अपनी नौकरी और प्रमोशन को लेकर चिंतित थे।

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सांसद जॉन ब्रिट्टास ने पेश किया निजी विधेयक

राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिट्टास ने ‘निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (संशोधन) विधेयक-2026’ को सदन के पटल पर रखा है। इस निजी विधेयक का मुख्य उद्देश्य उन शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दिलाना है, जिनकी नियुक्ति उस समय हुई थी जब यह नियम लागू नहीं था। इस संशोधन से अकेले एक राज्य में ही लगभग 60 से 70 हजार शिक्षकों को सीधा फायदा मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी थी चिंता

दरअसल, 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में 2012 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए भी टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया था। इस फैसले के बाद पुराने शिक्षकों के बीच अपनी नौकरी की सुरक्षा, वरिष्ठता और प्रमोशन को लेकर डर का माहौल बन गया था। इसी समस्या के समाधान के लिए अब कानून में बदलाव की मांग उठी है।

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क्या है प्रस्तावित संशोधन?

प्रस्तावित संशोधन में स्पष्ट किया गया है कि:

  • जो शिक्षक आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले की निर्धारित योग्यताओं के आधार पर नियुक्त हुए हैं, उन पर टीईटी जैसी अतिरिक्त शर्तें बाद में लागू नहीं की जाएंगी।

  • इससे शिक्षकों की नौकरी, प्रमोशन, वरिष्ठता और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभ पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

  • हालांकि, यह छूट केवल पुराने शिक्षकों के लिए होगी। भविष्य में होने वाली सभी नई भर्तियों के लिए टीईटी की अनिवार्यता पहले की तरह ही बनी रहेगी।

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दिल्ली के रामलीला मैदान में दिखा शिक्षकों का आक्रोश

इस मांग को लेकर देशभर के शिक्षकों ने हाल ही में दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल प्रदर्शन भी किया था। विभिन्न राज्यों से आए शिक्षकों ने सरकार से मांग की थी कि वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर परीक्षा का बोझ न डाला जाए। अब इस संशोधन विधेयक के आने से शिक्षकों में उम्मीद की नई किरण जगी है। फिलहाल सभी की नजरें संसद की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं कि क्या इस विधेयक को मंजूरी मिल पाती है या नहीं।

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