परिसीमन से बदलेगा छत्तीसगढ़ का सियासी नक्शा: बढ़ सकती हैं आरक्षित सीटें, कई सामान्य होने के आसार, जाने कहाँ कहाँ कितनी बढ़ेंगी सीट..
रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के निजी स्कूलों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी करने पर उनकी मान्यता समाप्त कर दी जाएगी।
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राज्य शासन ने साफ किया है कि सभी गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय स्कूलों को उनकी प्रारंभिक कक्षाओं की 25 प्रतिशत सीटों पर पात्र बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य है और यह उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है।
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अक्सर प्रतिपूर्ति राशि को लेकर होने वाली चर्चाओं पर विराम लगाते हुए सरकार ने आंकड़े जारी किए हैं। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2011-12 से ही कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए 7000 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक के लिए 11,400 रुपये की वार्षिक प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित है। यह राशि मध्य प्रदेश (4,419 रुपये), उत्तर प्रदेश (5,400 रुपये), बिहार (6,569 रुपये) और झारखंड (5,100 रुपये) जैसे पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी अधिक है।
शासन का मानना है कि समग्र मूल्यांकन में प्रदेश की भुगतान राशि पूरी तरह संतुलित और उचित है।
साढ़े तीन लाख से अधिक छात्र शिक्षा के हकदार
वर्तमान में प्रदेश के 6,862 निजी स्कूलों में 3,63,515 बच्चे आरटीई के माध्यम से निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस शैक्षणिक सत्र में भी कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया चल रही है। चूंकि इन निजी स्कूलों को आरटीई के प्रावधानों को स्वीकार करने की शर्त पर ही मान्यता दी गई है, इसलिए वे अब प्रवेश प्रक्रिया में किसी भी तरह का व्यवधान उत्पन्न नहीं कर सकते।
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कड़ी कार्रवाई की तैयारी में शिक्षा विभाग
शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि कोई स्कूल प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में बाधा डालता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने आम जनता और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी या अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें। राज्य सरकार गरीब तबके के बच्चों के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रतिबद्ध है।
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