जशपुर के सरना एथनिक रिसॉर्ट को मिला प्रतिष्ठित ‘ग्रीन लीफ अवॉर्ड’
फैज़ान अशरफ़
उज्जैन के महाकाल की नगरी के एक साधारण पुजारी परिवार से निकलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक पहुँचने का सफर कभी आसान नहीं होता। लेकिन जब इरादे फौलादी हों, तो एक साधारण परिवार का बेटा भी देश की सबसे कठिन परीक्षा को पहले ही प्रयास में न सिर्फ़ पास करता है, बल्कि 69वीं रैंक लाकर अपनी मेधा का लोहा मनवाता है।
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यह कहानी है जशपुर के वर्तमान कलेक्टर रोहित व्यास की—जिन्होंने नोएडा की बड़ी टेलीकॉम कंपनी में इंजीनियर की नौकरी छोड़कर ग्रामीण भारत की दिशा बदलने का संकल्प लिया। रात के 3 बजे उठकर की गई उनकी खामोश तपस्या आज जशपुर के विकास की गूंज बन चुकी है।

रोहित व्यास का जन्म 9 फरवरी 1990 को उज्जैन के एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ।
उनके पिता पंडित मदनलाल व्यास पुजारी थे और माता उषा व्यास बीएसएनएल में कार्यरत थीं।
बचपन से ही मेधावी रहे रोहित की शिक्षा इस प्रकार रही. पाँचवीं कक्षा लोकमान्य तिलक स्कूल, उज्जैन से 95%, दसवीं कक्षा वर्जिन मेरी स्कूल 85.6%,बारहवीं कक्षा उज्जैन पब्लिक स्कूल 82.4%, बीई (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन), वैष्णव कॉलेज, इंदौर – 70%, अंक लाकर अपने शिक्षा को गतिमान बनाये रखा
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कॉर्पोरेट नौकरी से फेलोशिप और फिर प्रशासनिक सेवा की ओर
बीई के बाद रोहित ने 2011 से 2014 तक नोएडा स्थित टेलीकॉम कंपनी एरिक्सन (Ericsson) में नेटवर्क इंजीनियर के रूप में काम किया। लेकिन उनका मन समाज के लिए कुछ बड़ा कर गुजरने में था। 2014 में उनका चयन प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास फेलोशिप के लिए हुआ।

उत्तर प्रदेश के चंदौली में फेलोशिप के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को ज़मीन पर काम करते देखकर उनके भीतर IAS बनने का सपना आकार लेने लगा। नौकरी और फेलोशिप के बीच उन्होंने बेहद अनुशासन के साथ तैयारी की
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10 बजे से फेलोशिप की ड्यूटी सोशल मीडिया से पूर्ण दूरी, लक्ष्य पर पूर्ण फोकस, 2017 में अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने 69वीं रैंक के साथ UPSC परीक्षा उत्तीर्ण की। जिस दिन परिणाम आया, वह उन्हीं के पिता का 59वां जन्मदिन था—यह उनके पिता के जीवन का सबसे गर्व का पल था।

प्रशासनिक यात्रा और जशपुर से जुड़ाव
IAS बनने के बाद रोहित व्यास ने राजनांदगांव, मुंगेली, बस्तर और भिलाई जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर सेवाएँ दीं।बगीचा (जशपुर) में SDM रहते हुए एंटी-करप्शन मुहिम ने उन्हें एक संवेदनशील, सक्रिय और जनहितकारी अधिकारी के रूप में पहचाना।

भिलाई में आयुक्त रहते हुए 500 युवाओं को रोजगार, मयाली को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल उनकी दूरदर्शिता का परिणाम था। 28 अक्टूबर 2024 से वे जशपुर के 20वें कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। वे शिक्षा, स्वास्थ्य और दिव्यांगजनों की सहायता को प्राथमिकता देते हैं।उनका सिद्धांत है कि “सीमाएँ परिस्थितियों में होती हैं, संकल्प में नहीं।” शिक्षा में परिवर्तन लाने के लिए मिशन कौतूहल और यशस्वी जशपुर जैसे कार्यक्रम में सक्रिय रहे.
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रोहित व्यास मानते हैं कि शिक्षा रटने का नहीं, जिज्ञासा पैदा करने का माध्यम है।मिशन कौतूहल के माध्यम सेबच्चों को विज्ञान के प्रयोगात्मक रूप से परिचित कराया गयाISRO के लाइव रॉकेट लॉन्च का अनुभव दिलाकर आदिवासी अंचलों के बच्चों की आँखों में वैज्ञानिक बनने का सपना जगाया. वर्तमान में वे यशस्वी जशपुर अभियान को नई ऊर्जा दे रहे हैं और शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा दे रहे हैं।
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मयाली को एडवेंचर और ईको-टूरिज्म केंद्र के रूप में स्थापित करना, जशपुर जम्बूरी से हस्तशिल्प और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा, भिलाई में BPO सेंटर की स्थापना, जशपुर में युवाओं को स्थानीय संसाधनों से जोड़कर रोजगार बढ़ाना उनकी विकास सोच का मजबूत उदाहरण हैं।

एक कलेक्टर के रूप में वे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार,
दिव्यांगजनों की सहायता त्वरित और संवेदनशील प्रशासन को अपनी प्राथमिकता में रखते हैं। उनकी सादगी, विनम्रता और जनता के प्रति सजगता ने उन्हें जशपुर का ‘जन-कलेक्टर’ बना दिया है।
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रोहित व्यास की कहानी बताती है कि अगर इरादे सच्चे हों और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
उन्होंने सिद्ध किया है कि विकास तभी सफल है जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

