रायपुर एक फरवरी 2026। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने केंद्रीय बजट को देश के समावेशी विकास मॉडल के बिल्कुल विपरीत बताते हुए कहा कि यह बजट असमानता बढ़ाने वाला है और इससे महंगाई तथा बेरोजगारी और तेज होगी। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए न कोई नई सिंचाई परियोजना लाई गई है, न खाद सब्सिडी में बढ़ोतरी की गई है और न ही कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की कोई ठोस योजना शामिल की गई है।
उन्होंने कहा कि कोयला देश के ऊर्जा ढांचे का मुख्य आधार है, लेकिन केंद्र सरकार ने पहले ही कोयले पर जीएसटी पांच प्रतिशत से बढ़ाकर अठारह प्रतिशत कर दिया और अब इस बजट में सेंट्रल एक्साइज कोल, माइनिंग और स्क्रैप पर टैक्स बढ़ाकर इसे और महंगा कर दिया गया है। इससे बिजली उत्पादन की लागत बढ़ेगी और जनता पर दोहरा बोझ पड़ेगा।
सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि शेयर बाजार में निवेश करना आम निवेशक के लिए अब और महंगा हो जाएगा क्योंकि एसटीटी को कई गुना बढ़ा दिया गया है जिससे फ्यूचर और ऑप्शन कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा। विदेश यात्रा, अध्ययन और चिकित्सा के लिए टीसीएस में की गई कटौती को उन्होंने राहत नहीं बल्कि मात्र प्रलोभन बताया और कहा कि सरकार इसे उपलब्धि की तरह प्रस्तुत कर रही है जबकि यह केवल दिखावटी कदम है।
उन्होंने कहा कि आयकर में छूट की सीमा वर्ष दो हजार चौदह में ढाई लाख रुपये थी और इस बजट में भी इसे एक रुपये तक नहीं बढ़ाया गया। बेसिक एक्सेम्प्शन लिमिट जस की तस रखी गई है। इसके साथ ही अस्सी सी और अस्सी डी की छूट में भी पिछले बारह वर्षों में कोई संशोधन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि पेडी, मिलेट, कनकी और चावल के निर्यात को बढ़ाने के लिए कोई योजना प्रस्तुत नहीं हुई, बल्कि कनकी के निर्यात पर प्रतिबंध जारी है और चावल निर्यात पर भारी कर में कोई कमी नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि तिरेपन लाख पचास हजार करोड़ के बजट में एमएसएमई को मात्र दस हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं जो नितांत अपर्याप्त है। इसी गलत नीतिगत दृष्टिकोण के कारण मोदी सरकार के कार्यकाल में नब्बे प्रतिशत एमएसएमई तीन वर्षों के भीतर बंद होने को मजबूर हुए हैं। छोटे घरेलू उद्योगों को राहत की उम्मीद थी लेकिन यह बजट उनकी सभी अपेक्षाओं के विपरीत निकला।
उन्होंने कहा कि युवाओं के रोजगार की आशा टूट गई है, महिलाओं की बचत कम करने वाला प्रावधान किया गया है और किसानों को फिर एक बार निराशा मिली है। निर्माण और निर्यात बढ़ाने के लिए कोई व्यवहारिक योजना नहीं दी गई और छोटे तथा मध्यम उद्योगों के समर्थन की बजाय यह बजट असमानता बढ़ाने वाला सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह बजट जनहित के बजाय चुनिंदा वर्गों के हितों को साधने वाला है और देश की अर्थव्यवस्था को संतुलित दिशा देने में विफल साबित होगा।

