”बेखुदी का वन-शॉट: कुदरती जाम में डूबी हवाएँ और दरख्तों का इश्किया मिजाज”
नई दिल्ली | 14 फरवरी, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक ने देश के प्रशासनिक और आर्थिक ढांचे के लिए एक नई दिशा तय कर दी है। सबसे बड़ा और भावनात्मक बदलाव सत्ता के केंद्र के रूप में हुआ है, जहाँ 95 वर्षों से चल रहे साउथ और नॉर्थ ब्लॉक से विदाई लेकर अब सरकार का संचालन नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवातीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवनों’ से होगा। यह स्थानांतरण केवल स्थान का परिवर्तन नहीं है, बल्कि औपनिवेशिक अतीत को पीछे छोड़कर एक आत्मनिर्भर और सेवा-उन्मुख भारत की ओर बढ़ने का प्रतीक है। खाली किए गए इन ऐतिहासिक भवनों को अब ‘युगे युगीन भारत’ राष्ट्रीय संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा, जो हमारी हजारों साल पुरानी सभ्यता और गौरवशाली इतिहास को आने वाली पीढ़ियों से जोड़ेगा।
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प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए स्टार्टअप जगत को भी बड़ा तोहफा दिया है। 10,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ को मंजूरी दी गई है, जो विशेष रूप से डीप टेक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उच्च-तकनीकी विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में नवाचार करने वाले युवाओं को वित्तीय मजबूती प्रदान करेगा। यह पहल भारत को दुनिया के अग्रणी स्टार्टअप देशों की कतार में और मजबूती से खड़ा करेगी।
शहरी विकास के मोर्चे पर भी कैबिनेट ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए 1 लाख करोड़ रुपये के ‘शहरी चुनौती कोष’ (UCF) को हरी झंडी दिखाई है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शहरों को केवल अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय उन्हें अपनी साख सुधारने और बाजार से निवेश जुटाने के लिए प्रेरित करेगी। इससे अगले पांच वर्षों में शहरी बुनियादी ढांचे में करीब 4 लाख करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है, जिससे हमारे शहर अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और आर्थिक रूप से सक्षम बन सकेंगे। छोटे शहरों की मदद के लिए सरकार ने 5,000 करोड़ रुपये की विशेष क्रेडिट गारंटी योजना भी शुरू की है।
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अंत में, दिल्ली-एनसीआर के बुनियादी ढांचे को और विस्तार देते हुए नोएडा सेक्टर-142 से बॉटेनिकल गार्डन तक 11.56 किलोमीटर लंबे नए मेट्रो कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है। यह विस्तार न केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर करेगा, बल्कि आईटी हब और शैक्षणिक संस्थानों में काम करने वाले लाखों यात्रियों के लिए सफर को सुगम और प्रदूषण मुक्त बनाएगा। कुल मिलाकर, आज के ये फैसले विरासत के सम्मान और भविष्य के आधुनिक भारत के निर्माण के बीच एक बेहतरीन संतुलन कायम करते हैं।
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