मुख्यमंत्री और मंत्रियों का क्षेत्र: जब ‘जवाब देने वाला’ ही बन जाए फरियादी
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र की कार्यवाही आज सुबह 11:00 बजे से शुरू होगी, जिसमें प्रदेश के विकास और व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया जाएगा। विधानसभा सचिव दिनेश शर्मा द्वारा जारी कार्यसूची के अनुसार, आज का दिन विधायी कार्यों और बजट आवंटन की दृष्टि से काफी निर्णायक रहने वाला है।सदन की शुरुआत में ही ध्यानाकर्षण सूचनाओं के माध्यम से सरकार को घेरे जाने की तैयारी है।
”अभी भी बरकरार है देसी रंगीन और रसीली शहतूत की धाक: जंगलों से निकलकर हाट-बाज़ारों तक का सफर”
विधायक श्रीमती भावना बोहरा प्रदेश में वन अधिकार पट्टों के वितरण की धीमी प्रक्रिया का मामला उठाते हुए आदिम जाति विकास मंत्री का ध्यान इस ओर खींचेंगी। वहीं, विधायक श्री ब्यास कश्यप कारखानों में उद्योग नीति के उल्लंघन और स्थानीय हितों की अनदेखी जैसे संवेदनशील विषय पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री से जवाब मांगेंगे।
आज पटल पर कई महत्वपूर्ण वार्षिक प्रतिवेदन भी रखे जाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ लोक सेवा आरक्षण अधिनियम का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे, जबकि सहकारिता मंत्री केदार कश्यप और मंत्री रामविचार नेताम अपने-अपने विभागों से संबंधित आयोगों और संघों की ऑडिट रिपोर्ट और वार्षिक लेखा-जोखा सदन के सामने रखेंगे।
कार्यवाही का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अनुदान मांगों पर चर्चा का रहेगा। आज सदन में प्रदेश के दोनों उप-मुख्यमंत्रियों के प्रभार वाले विभागों के भविष्य का खाका तय होगा। डिप्टी सीएम अरुण साव के अधीन आने वाले लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन, और लोक निर्माण विभाग जैसे बुनियादी ढांचे से जुड़े विभागों के बजट पर चर्चा होगी। साथ ही, डिप्टी सीएम विजय शर्मा के गृह विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, और तकनीकी विभागों की वित्तीय मांगों पर भी विस्तार से बहस की जाएगी। विपक्ष की कोशिश होगी कि इन महत्वपूर्ण विभागों के कामकाज और बजट उपयोग को लेकर सरकार को घेरे, जबकि सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों के दम पर बजट पारित कराने का प्रयास करेगा।

