रायपुर: छत्तीसगढ़ बीजेपी उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय घर वापसी मुहिम के प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जुदेव ने छत्तीसगढ़ के नए ‘धर्म स्वातंत्र्य कानून’ को राज्य की विष्णुदेव साय सरकार की एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने धर्मांतरण, घर वापसी अभियान की चुनौतियों और कांग्रेस के विरोध पर खुलकर अपनी बात रखी।
पिता के संकल्पों की जीत
प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि यह कानून उन हजारों कार्यकर्ताओं के संघर्ष का परिणाम है, जिन्होंने धर्मांतरण रोकने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने पिता, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव को याद करते हुए कहा, “पिताजी ने आदिवासियों के पैर पखार कर उन्हें सनातनी विचारधारा से जोड़ने का जो शंखनाद किया था, यह कानून उन्हें एक सच्ची श्रद्धांजलि है। इससे हमारी सनातन संस्कृति को संरक्षण और मजबूती मिलेगी।”

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घर वापसी में जान का जोखिम
धर्मांतरित लोगों की मूल धर्म में वापसी कराने के दौरान आने वाली दिक्कतों पर उन्होंने बताया कि यह कार्य आसान नहीं है। षड्यंत्रकारी शक्तियां भय का माहौल बनाती हैं और कार्यक्रम से पहले लोगों को धमकियां दी जाती हैं। उन्होंने कहा, “हम अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर और तमाम साजिशों का सामना करते हुए इस पुनीत कार्य को अंजाम देते हैं।”
कांग्रेस पर तीखा हमला
कांग्रेस द्वारा कानून के विरोध पर जूदेव ने कहा कि नकारात्मक माहौल पैदा करना कांग्रेस की संस्कृति रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब केवल भ्रष्टाचार हुआ। वे पूछते थे कि बीजेपी कानून क्यों नहीं ला रही, और अब जब हम कानून ले आए हैं, तो उन्हें दिक्कत हो रही है।”
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ईसाई मिशनरियों और प्रलोभन पर प्रहार
ईसाई मिशनरियों पर लगने वाले धर्मांतरण के आरोपों पर उन्होंने कहा कि कई निजी स्कूलों और संस्थानों में प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने की शिकायतें मिलती रहती हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब नया कानून लागू होने से ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित होगी और पीड़ितों को डरने की जरूरत नहीं है।
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केवल कानून काफी नहीं, जागरूकता है जरूरी
कानून की प्रभावशीलता पर बात करते हुए प्रबल प्रताप सिंह ने एक महत्वपूर्ण बिंदु रखा। उन्होंने कहा, “कानून तो बन गया है, लेकिन इसका सही क्रियान्वयन (Implementation) बड़ी चुनौती है। केवल कानून से काम नहीं चलेगा, हिंदू समाज और विशेषकर युवाओं को जागरूक होना होगा।” उन्होंने अपील की कि हर सनातनी को एकजुट होकर अपनी संस्कृति की रक्षा का दायित्व निभाना होगा, तभी यह कानून पूरी तरह सफल होगा।
“मेरे शरीर में जब तक प्राण हैं, मैं सनातन धर्म की संस्कृति के प्रचार-प्रसार और घर वापसी अभियान के लिए अनवरत समर्पित रहूंगा।”
— प्रबल प्रताप सिंह जूदेव
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