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छत्तीसगढ़ में रफ्तार का कहर और नेशनल हाईवे की त्रुटिपूर्ण बनावट आम जनता के लिए जानलेवा साबित हो रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और राज्य पुलिस विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में होने वाली कुल सड़क दुर्घटनाओं में से पचास फीसदी से अधिक हादसे नेशनल और स्टेट हाईवे पर ही दर्ज किए जा रहे हैं। विधानसभा में दी गई एक आधिकारिक जानकारी के मुताबिक पिछले छह वर्षों में राज्य के भीतर लगभग 79,523 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 33,700 से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों और पुलिस प्रशासन ने पूरे प्रदेश में दुर्घटनाओं के लिहाज से 848 ‘ब्लैक स्पॉट’ यानी बेहद संवेदनशील और खतरनाक क्षेत्र चिह्नित किए हैं, जहाँ बार-बार होने वाले हादसों को रोकने के लिए अब सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

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सरकारी रिपोर्ट के अनुसार राज्य के तीन मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग भारी मालवाहक वाहनों के दबाव और तकनीकी खामियों के कारण सबसे अधिक दुर्घटना संभावित पाए गए हैं। इनमें राजधानी रायपुर से धमतरी, कांकेर और कोंडागांव होते हुए बस्तर के जगदलपुर को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे 30 सबसे संवेदनशील मार्ग बन चुका है, जहाँ तेज रफ्तार और आमने-सामने की भिड़ंत के कारण सबसे ज्यादा मौतें रिकॉर्ड होती हैं। इसी तरह महाराष्ट्र की सीमा राजनंदगांव से शुरू होकर दुर्ग, रायपुर और महासमुंद होते हुए ओडिशा तक जाने वाले नेशनल हाईवे 53 पर भारी औद्योगिक ट्रैफिक के बीच अंधाधुंध रफ्तार के चलते आए दिन गाड़ियां आपस में टकराती हैं। इसके अलावा बिलासपुर से कटघोरा और अंबिकापुर को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे 130 पर कोयले से लदे भारी ट्रकों की चौबीसों घंटे आवाजाही और खतरनाक मोड़ हादसों का मुख्य कारण बने हुए हैं।

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हाईवे के जो हिस्से पहाड़ी क्षेत्रों और घाटियों से होकर गुजरते हैं, वे ड्राइवरों के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो रहे हैं और इनमें चार घाटियों को आधिकारिक तौर पर सबसे बड़ा डेंजर जोन माना गया है। बस्तर का प्रवेश द्वार कही जाने वाली प्रसिद्ध केशकाल घाटी के 12 तीखे मोड़ सबसे बड़े ब्लैक स्पॉट हैं, जहाँ अक्सर भारी ट्रक अनियंत्रित होकर पलट जाते हैं। वहीं छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाली व्यस्त चिल्फी घाटी में सर्दियों के दिनों में घना कोहरा और बारिश के मौसम में होने वाली परिसंचरण की दिक्कतें तथा फिसलन गाड़ियों को सीधे खाई में धकेल देती हैं। इसके साथ ही केंडा घाटी के तीखे उतार-चढ़ाव और अंधाधुंध मोड़ों की वजह से लगातार अनियंत्रित वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं, तो वहीं पहाड़ियों को काटकर बनाई गई बैताल रानी घाटी की नई सड़क पर भी तीखे मोड़ों के कारण जरा सी लापरवाही भारी पड़ रही है।

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पुलिस विभाग की आधिकारिक जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि अधिकांश हादसे तेज रफ्तार, मोड़ों पर दृश्यता की कमी और रात के समय हाईवे के किनारे बिना इंडिकेटर या लाइट के खड़े रहने वाले भारी ट्रकों के कारण होते हैं। इस खूनी रफ्तार पर लगाम कसने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कवायद शुरू कर दी गई है, जिसके तहत लोक… PWD और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सहयोग से अब तक चिह्नित किए गए ब्लैक स्पॉट्स में से 790 से अधिक स्थानों पर सुधार कार्य जैसे सड़कों को चौड़ा करना, रिफ्लेक्टर लगाना, चेतावनी बोर्ड और स्पीड ब्रेकर बनाने का काम पूरा कर लिया गया है ताकि इन हादसों में प्रभावी कमी लाई जा सके।

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