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रायपुर। बच्चों से जुड़े यौन अपराधों के मामलों के निपटारे में छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2025 में देशभर में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रन की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पॉक्सो मामलों के निस्तारण की दर के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य पहले पायदान पर रहा है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब देश के कई राज्यों में पुराने मामलों का बोझ अब भी अदालतों पर बना हुआ है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2025 में देशभर में पॉक्सो के 80,320 नए मामले दर्ज हुए, जबकि अदालतों ने 87,754 मामलों का निपटारा किया। इससे राष्ट्रीय निपटान दर 109 प्रतिशत रही। इस दौरान 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निस्तारण दर 100 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई, जिनमें छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन सबसे प्रभावी रहा।हालांकि रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि बेहतर निपटान दर के बावजूद कई पुराने मामले अब भी लंबित हैं। खासतौर पर लंबे समय से अटके मामलों को लेकर चिंता जताई गई है, क्योंकि इससे यौन शोषण के शिकार बच्चों के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है।
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रिपोर्ट के अनुसार, देश में पॉक्सो मामलों का बैकलॉग खत्म करने के लिए अगले चार वर्षों में करीब 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतों की आवश्यकता होगी। इसके लिए निर्भया फंड के उपयोग की सिफारिश भी की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो बच्चों को समय पर न्याय मिल सकेगा और न्याय प्रणाली पर भरोसा भी मजबूत होगा।
छत्तीसगढ़ के संदर्भ में विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य में अदालतों द्वारा पुराने और नए दोनों तरह के मामलों पर समान रूप से ध्यान दिया गया, जिससे निपटान की रफ्तार तेज हुई। यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय हो सकता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि यदि संसाधनों और प्राथमिकताओं को सही दिशा दी जाए, तो बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों में न्याय में देरी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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