दिल्ली में सोमवार को जंतर-मंतर से संसद तक प्रस्तावित CJP ‘चलो संसद’ मार्च को लेकर माहौल बेहद गर्म है। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है। दिल्ली पुलिस ने बिना अनुमति मार्च निकालने पर रोक लगाते हुए जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक कई स्तरों पर बैरिकेडिंग कर दी है। वहीं लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए सरकार के सामने तीन अहम शर्तें रख दी हैं। ऐसे में पूरे घटनाक्रम पर देशभर की नजर बनी हुई है।
जंतर-मंतर से संसद तक हाई अलर्ट, पुलिस और RAF की भारी तैनाती
संसद मार्च को देखते हुए सोमवार सुबह से ही जंतर-मंतर, पटेल चौक और केंद्रीय सचिवालय इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई। दिल्ली पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पुलिस का कहना है कि मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई है, इसलिए किसी भी प्रदर्शनकारी को संसद क्षेत्र की ओर बढ़ने नहीं दिया जाएगा।
सुबह से ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटने लगी, जबकि पुलिस ने कई जगह बैरिकेड लगाकर आवाजाही सीमित कर दी। सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
मुख्य अपडेट
- जंतर-मंतर से संसद मार्च के लिए अनुमति नहीं मिली।
- संसद मार्ग तक 8 लेयर सुरक्षा बैरिकेडिंग।
- RAF, दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात।
- संसद का मानसून सत्र शुरू होने से सुरक्षा बढ़ाई गई।
- जंतर-मंतर पर सुबह से प्रदर्शनकारियों की भीड़।
मेट्रो स्टेशनों पर भी असर, कई जगह सुरक्षा बढ़ाई गई
संसद मार्च का असर दिल्ली मेट्रो सेवाओं पर भी देखने को मिला। केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन का केवल एक गेट खुला रखा गया, जबकि पटेल चौक मेट्रो स्टेशन का एक्जिट सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया। मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के बाहर भी लोगों की भीड़ जमा होने के बाद पुलिस अतिरिक्त सतर्क हो गई।
यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा से पहले मेट्रो और ट्रैफिक संबंधी ताजा अपडेट जरूर जांच लें, क्योंकि सुरक्षा व्यवस्था के चलते कुछ मार्गों पर आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं तीन अहम शर्तें
22 दिनों से अधिक समय से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने सरकार के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। उनका कहना है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं और पेपर लीक जैसे मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करे। दूसरी शर्त के तहत वे चाहते हैं कि उन्हें और CJP नेतृत्व को संसद तक पहुंचने दिया जाए, जहां विभिन्न दलों के सांसद सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे को संसद में उठाने का आश्वासन दें।
यदि स्वास्थ्य कारणों से उनका संसद जाना संभव नहीं होता, तो तीसरी शर्त के अनुसार विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद अस्पताल पहुंचकर लिखित या सार्वजनिक आश्वासन दें।
सोनम वांगचुक की 3 शर्तें
- शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक मामलों पर सरकार जिम्मेदारी स्वीकार करे।
- CJP नेतृत्व को संसद पहुंचकर सांसदों से मिलने दिया जाए।
- स्वास्थ्य कारणों से संभव न होने पर सांसद अस्पताल आकर मुद्दा उठाने का भरोसा दें।
AISA के छात्र खत्म करेंगे भूख हड़ताल
भूख हड़ताल कर रहे AISA के तीन छात्र 23वें दिन अपना अनशन समाप्त करेंगे। जानकारी के अनुसार विपक्षी सांसदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों के प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों से मुलाकात कर संघर्ष का तरीका बदलने की अपील की। प्रतिनिधिमंडल ने भरोसा दिलाया कि संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाया जाएगा।
क्या बोले CJP के संस्थापक?
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया कि यह देश के इतिहास के सबसे बड़े लोकतांत्रिक मार्चों में से एक होगा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग देशभर से दिल्ली पहुंचे हैं और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज संसद तक पहुंचाना चाहते हैं। हालांकि पुलिस ने साफ कर दिया है कि बिना अनुमति किसी भी मार्च को संसद क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली में सुरक्षा और प्रदर्शन दोनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। एक ओर CJP संसद मार्च पर अड़ा हुआ है, तो दूसरी ओर दिल्ली पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू किए हुए है। वहीं सोनम वांगचुक की तीन शर्तों ने इस पूरे आंदोलन को नई राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले घंटों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के अगले कदम पर सभी की नजर रहेगी। ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए हमें Facebook और Instagram पर फॉलो करें।

