भ्रामक और फर्जी खबरों पर नकेल: अभिव्यक्ति की आजादी के बीच डिजिटल अनुशासन पर सरकार सख्त
नई दिल्ली: भारत अब दुनिया के लिए केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि ‘ग्लोबल कंटेंट हब’ के रूप में उभर रहा है। सरकार की महत्वाकांक्षी पहल “क्रिएट इन इंडिया, क्रिएट फॉर द वर्ल्ड” के तहत आयोजित ‘वेव्स’ (WAVES) सम्मेलन ने भारतीय रचनात्मकता को वैश्विक मंच प्रदान कर एक नया इतिहास रच दिया है। इस पहल के माध्यम से देश के क्रिएटर्स, प्रोड्यूसर्स और स्टार्टअप्स को दुनिया के 100 से अधिक देशों के खरीदारों, निवेशकों और ओटीटी दिग्गजों के साथ सीधे जुड़ने का मौका मिला है।
राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने बताया कि कैसे भारत की रचनात्मक पूंजी को नौकरियों और निर्यात वृद्धि में बदला जा रहा है। इस मिशन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘क्रिएट इन इंडिया चैलेंजेस’ (CIC) के तहत एनीमेशन, गेमिंग, एआर/वीआर और म्यूजिक जैसी श्रेणियों में एक लाख से अधिक पंजीकरण प्राप्त हुए। इन चुनौतियों के विजेताओं को अब कान, टोक्यो, टोरंटो और मैड्रिड जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा दिखाने और बिजनेस मीटिंग्स करने के लिए सरकारी समर्थन दिया जा रहा है।
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स्टार्टअप्स और नवाचार को नई उड़ान मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘वेवएक्स’ (WaveX) एक प्रमुख इनक्यूबेशन प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। वर्तमान में यह 34 स्टार्टअप्स को अपनी देखरेख में विकसित कर रहा है, जबकि 100 से अधिक आवेदन प्रक्रिया में हैं। विशेष रूप से ‘कलासेतु’ और ‘भाषासेतु’ जैसे चैलेंजेस के माध्यम से चुने गए स्टार्टअप सरकारी संगठनों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। आईआईटी दिल्ली और टी-हब हैदराबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ साझेदारी ने इस अभियान को तकनीकी मजबूती प्रदान की है।
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डिजिटल मार्केटप्लेस: ‘वेव्स बाज़ार’ भारतीय ऑडियो-विजुअल कंटेंट के अंतरराष्ट्रीय विस्तार के लिए ‘वेव्स बाज़ार’ को एक साल भर चलने वाले डिजिटल मार्केटप्लेस के रूप में स्थापित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म लाइसेंसिंग, को-प्रोडक्शन और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच को आसान बना रहा है। वर्तमान में इसमें 6,000 से अधिक विक्रेता और 4,000 खरीदार पंजीकृत हैं, जो अब तक 8,000 से अधिक बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बैठकें कर चुके हैं। चार महाद्वीपों में फैली इसकी पहुंच ने कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों और निवेश साझेदारियों का मार्ग प्रशस्त किया है।
सरकार का लक्ष्य अब इस रचनात्मक कार्यबल के कौशल को और निखारना है। वैश्विक विशेषज्ञों द्वारा मास्टरक्लास और कार्यशालाओं के माध्यम से क्रिएटर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि भारतीय कंटेंट का निर्यात बढ़ सके और रचनात्मक प्रतिभा को एक स्थायी आजीविका मिल सके। ‘वेव्स’ के माध्यम से भारत अब वैश्विक मनोरंजन जगत में अपनी एक विशिष्ट और सशक्त पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।

