“छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रा अपडेट: अंबिकापुर-मुंगेली को मिले सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स, राज्य भर में सड़क उन्नयन के लिए 500 करोड़ मंजूर”
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक महत्वपूर्ण लेख साझा करते हुए यह रेखांकित किया है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम अब केवल एक संवाद मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की शैक्षिक यात्रा में एक युगांतरकारी बदलाव का प्रतीक बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह पहल एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप ले चुकी है, जो न केवल छात्रों के परीक्षा के तनाव को दूर कर रही है बल्कि एक ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ने का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है।
इस विषय पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के विचारों का समर्थन करते हुए पीएमओ इंडिया ने स्पष्ट किया कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में आ रहे ये बदलाव दूरगामी परिणाम वाले हैं। शिक्षा मंत्री ने अपने लेख में विशेष रूप से नई शिक्षा नीति (NEP 2020) की भूमिका की सराहना की है। उन्होंने बताया कि यह नीति अपने बाल-केंद्रित दृष्टिकोण और भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर विशेष ध्यान देने के कारण छात्रों को अधिक सशक्त बना रही है। इसके साथ ही, मातृभाषा में शिक्षा पर दिए जा रहे जोर ने सीखने की प्रक्रिया को और अधिक सहज और समावेशी बना दिया है।
मनरेगा बचाओ महासंग्राम : कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, जशपुर में दिखेगा जनआक्रोश
यह लेख स्पष्ट करता है कि सरकार का विजन छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें 21वीं सदी की वैश्विक चुनौतियों के लिए मानसिक और बौद्धिक रूप से तैयार करना है। ‘परीक्षा पे चर्चा’ जैसे मंचों के माध्यम से प्रधानमंत्री स्वयं छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ जुड़कर एक ऐसा वातावरण तैयार कर रहे हैं, जहाँ परीक्षा को बोझ नहीं बल्कि उत्सव की तरह देखा जा सके। अंततः, शिक्षा के प्रति यह सकारात्मक और आधुनिक दृष्टिकोण ही आने वाले समय में सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत करेगा।
खराब रिज़ल्ट पर कलेक्टर का हंटर; बीईओ और एबीईओ की सैलरी रुकी, 8 प्राचार्यों की वेतन वृद्धि पर रोक


