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नई दिल्ली, 05 फरवरी 2026:
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पृथ्वी’ (PRITHVI) योजना ने देश की आपदा प्रबंधन और मौसम पूर्वानुमान प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने की क्षमता में 40% का सुधार हुआ है। विशेष रूप से भारी वर्षा की चेतावनी देने की सटीकता अब 85% तक पहुँच गई है, जो 2020 में महज 77% थी।
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पृथ्वी के पाँचों घटकों पर एक साथ वार
PRITHVI योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पृथ्वी के पाँचों प्रमुख घटकों—वायुमंडल, जलमंडल, भूगर्भ (Geosphere), हिममंडल (Cryosphere) और जीवमंडल—को एक समग्र रूप में संबोधित करती है। इसका मुख्य उद्देश्य न केवल मौसम और जलवायु परिवर्तन को समझना है, बल्कि समुद्री संसाधनों की खोज और भूकंपीय गतिविधियों की सख्त निगरानी करना भी है।
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तकनीकी विस्तार: रडार और ऑब्जर्वेशन नेटवर्क
पृथ्वी विज्ञान योजना के तहत देश की निगरानी प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार किया गया है। अब भारत की मौसम और भूगर्भीय गतिविधियों पर नज़र रखने की क्षमता पहले से कहीं अधिक आधुनिक और व्यापक हो गई है।
इस विस्तार की सबसे अहम कड़ी डॉप्लर रडार (DWR) नेटवर्क है, जिसकी संख्या बढ़ाकर अब 47 स्टेशनों तक कर दी गई है। यह रडार चक्रवात और भारी बारिश जैसी घटनाओं की सटीक और समय रहते जानकारी देने में सक्षम हैं। इसी के साथ, धरातल पर मौसम के बारीक बदलावों को पकड़ने के लिए 400 नए स्वचालित मौसम स्टेशन (AWS) स्थापित किए गए हैं। विशेष रूप से किसानों की मदद के लिए 200 कृषि-विशिष्ट AWS भी जोड़े गए हैं, जो ग्रामीण स्तर पर सटीक डेटा प्रदान कर रहे हैं।
समुद्री सुरक्षा और संसाधनों की निगरानी के लिए हिंद महासागर में तकनीक का जाल बिछाया गया है। इसमें 31 आर्गो फ्लोट्स की तैनाती और 14 नए ज्वार स्टेशनों की स्थापना शामिल है, जो सुनामी और समुद्री लहरों के अलर्ट को अधिक विश्वसनीय बनाते हैं। वहीं, भूगर्भीय हलचलों पर पैनी नजर रखने के लिए राष्ट्रीय भूकंपीय नेटवर्क को 165 कार्यशील स्टेशनों तक विस्तारित किया गया है। यह नेटवर्क इतना संवेदनशील है कि देश के किसी भी कोने में 3.0 तीव्रता से ऊपर के भूकंपीय झटकों को तुरंत रिकॉर्ड कर सकता है।
इन तकनीकी सुधारों का सीधा परिणाम यह हुआ है कि अब आपदाओं की भविष्यवाणी केवल अनुमान नहीं, बल्कि डेटा पर आधारित सटीक चेतावनी बन गई है।
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स्वदेशी मॉडलिंग और सटीक चेतावनी
मंत्रालय ने ‘भारत पूर्वानुमान प्रणाली’ (Bharat FS) विकसित की है, जो 6 किमी के उच्चतम रिज़ॉल्यूशन पर वैश्विक मॉडल प्रदान करती है। चक्रवात ‘डाना’ के दौरान इस प्रणाली का सफल प्रदर्शन देखा गया। इसके अलावा, आर्कटिक और अंटार्कटिक जैसे ध्रुवीय क्षेत्रों के लिए भी विशेष जलवायु मॉडल तैयार किए गए हैं।
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तटीय सुरक्षा और सामाजिक लाभ
रिपोर्ट के अनुसार, तटीय आबादी को सुनामी, ऊँची लहरों के अलर्ट और तेल रिसाव जैसी आपदाओं के लिए उन्नत चेतावनी सेवाएँ दी जा रही हैं। जिला स्तर पर ‘प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान’ प्रसारित किए जा रहे हैं, जिससे जिला प्रशासन को लू (Heat wave) और शीत लहर जैसी स्थितियों में समय रहते निवारक कार्रवाई करने में मदद मिल रही है।



