नई दिल्ली:
केंद्र सरकार के लगभग 49 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में इस बार 3 से 4 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का अनुमान है। नियमानुसार यह बढ़ोतरी पहली जुलाई से प्रभावी होनी चाहिए, लेकिन तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी केंद्र सरकार की ओर से अब तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इस लगातार हो रही देरी को लेकर कर्मचारियों और पेंशनरों में भारी रोष व्याप्त हो गया है। ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स’ ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर इस लेटलतीफी पर कड़ा विरोध जताया है और शुक्रवार को देशभर के कार्यालयों में दोपहर के भोजन अवकाश के दौरान विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। कर्मचारी संगठनों की दो टूक मांग है कि सरकार बिना किसी विलंब के तत्काल प्रभाव से डीए और डीआर में बढ़ोतरी का आदेश जारी करे।
कॉन्फेडरेशन के अध्यक्ष एसबी यादव ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते में हर वर्ष 1 जनवरी और 1 जुलाई से वृद्धि किए जाने का स्पष्ट नियम है, लेकिन सरकार हर बार इसकी घोषणा में बेवजह देरी करती है। अमूमन जनवरी की किस्त का ऐलान मार्च-अप्रैल में और जुलाई की किस्त का ऐलान अक्टूबर के आखिरी सप्ताह तक घसीटा जाता है, जिससे त्योहारी सीजन में कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति और बजट पर सीधा असर पड़ता है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मियों को 60 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। पिछले वर्ष जुलाई में इसमें 3 प्रतिशत की वृद्धि के बाद यह 58 प्रतिशत हुआ था और फिर 1 जनवरी 2026 से 2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 60 फीसदी पर पहुंचा था।
श्रम ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 से जुलाई 2026 के बीच अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। यह सूचकांक जनवरी में 148.6 से बढ़कर जुलाई में 153.2 के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि जून 2026 में खुदरा महंगाई दर पिछले साल के 2.55 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 4.76 फीसदी दर्ज की गई थी। इसी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर कर्मियों को इस बार कम से कम 3 से 4 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी की पूरी उम्मीद है।
इस बीच डीए की दर 50 फीसदी से ऊपर जाने के बावजूद इसे मूल वेतन में मर्ज न किए जाने को लेकर भी कर्मचारियों में गहरा असंतोष बना हुआ है। ‘नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल का कहना है कि नियमों के मुताबिक डीए 50 प्रतिशत पार करते ही मूल वेतन में विलय होना चाहिए था, लेकिन सरकार के इनकार से कर्मचारियों को हर महीने करीब 10 प्रतिशत वेतन का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है, जो आठवें वेतन आयोग के लागू होने तक जारी रहेगा। इसके साथ ही कर्मचारी संगठनों ने डीए गणना के मौजूदा 12 महीने के औसत फॉर्मूले को बदलकर बैंकों और एलआईसी की तर्ज पर हर तीन महीने में परिवर्तनीय आधार और पॉइंट-टू-पॉइंट दशमलव सहित भुगतान करने तथा केंद्रीय कर्मियों के लिए अलग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तैयार करने की मांग भी दोहराई है।


