रायपुर: छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर छिड़े विवाद और शिक्षक संघों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने शिक्षकों के हित में ऐतिहासिक और राहत भरा कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शिक्षक प्रतिनिधिमंडलों के साथ अलग-अलग उच्चस्तरीय बैठकों के बाद स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया है कि प्रदेश के किसी भी शिक्षक की नौकरी नहीं जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे में आने वाले लगभग 80 से 85 हजार गैर-टीईटी पास शिक्षकों के लिए सरकार सामान्य टीईटी से अलग, मध्य प्रदेश और ओडिशा की तर्ज पर विभागीय स्तर पर विशेष परीक्षा आयोजित कराने की तैयारी कर रही है।
सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक मनीष मिश्रा के नेतृत्व में देर रात हुई मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिक्षकों की सभी चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि सरकार शिक्षकों और उनके परिवारों के हितों की पूरी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अन्य राज्यों के सफल मॉडलों का अध्ययन किया जा रहा है और 2028 तक की समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए प्रमोशन नियमों की अड़चनों को भी दूर किया जाएगा। साथ ही, ‘मोदी की गारंटी’ में शामिल वेतन विसंगति के मुद्दे पर भी अधिकारियों से चर्चा कर जल्द समाधान निकालने का भरोसा दिया। मुलाकात के दौरान जशपुर से आईं शिक्षिकाओं ने मुख्यमंत्री को रक्षा सूत्र भी बांधा।
दूसरी ओर, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे, केदार जैन और टीचर्स एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष संजय शर्मा सहित अन्य नेताओं के साथ मंत्रालय में अहम बैठक की। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को विभागीय टीईटी की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि पदोन्नति में नियमों को लेकर विधि विभाग से राय ली जा रही है तथा वित्तीय मांगों पर जल्द ही वित्त मंत्री से चर्चा की जाएगी। सरकार के इस सकारात्मक रुख, नौकरी की सुरक्षा की गारंटी और अलग से विभागीय परीक्षा कराने के निर्णय का सभी शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है।



