राउरकेला NIT का कमाल: अब चलने के अंदाज़ से पकड़े जाएंगे घुसपैठिए, विकसित की अभेद्य सुरक्षा प्रणाली
नई दिल्ली | 26 मार्च 2026
संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वर्ष 2026-27 के लिए अनुदान मांगों पर अपनी 377वीं रिपोर्ट राज्यसभा और लोकसभा में प्रस्तुत कर दी है। राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली इस समिति ने मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं और स्वायत्त निकायों के कामकाज की गहन समीक्षा की। समिति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि महिलाओं की सुरक्षा और बच्चों के पोषण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के बजट में कटौती करना उचित नहीं है। रिपोर्ट में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की वेतन वृद्धि से लेकर निर्भया फंड के उपयोग तक कई क्रांतिकारी बदलावों का सुझाव दिया गया है।
आंगनवाड़ी और पोषण: मानदेय बढ़ाने की पुरजोर सिफारिश
सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 मिशन के तहत समिति ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय (Salary) में तत्काल वृद्धि की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि इन कार्यकर्ताओं का कार्यक्षेत्र बढ़ गया है और उन्हें उचित पारिश्रमिक देना उनका वैध अधिकार है। साथ ही, पोषण ट्रैकर ऐप में आने वाली नेटवर्क की समस्याओं और कार्यकर्ताओं की डिजिटल साक्षरता को लेकर भी चिंता जताई गई है। समिति ने आंगनवाड़ियों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की कड़ाई से निगरानी करने और प्रति इकाई लागत मानकों को बढ़ाने का निर्देश दिया है ताकि बच्चों को बेहतर पोषण मिल सके।
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मिशन शक्ति: वन स्टॉप सेंटर और महिला सुरक्षा
महिलाओं की सुरक्षा के लिए चल रहे ‘मिशन शक्ति’ को लेकर समिति ने पाया कि कई ‘वन स्टॉप सेंटर’ केवल अस्थाई आवास गृह बनकर रह गए हैं। सिफारिश की गई है कि इन केंद्रों के भीतर ही पुलिस और कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए ताकि पीड़िता को भटकना न पड़े। इसके अलावा, 181 महिला हेल्पलाइन को मात्र कॉल सेंटर न रखकर उसे जमीनी स्तर पर बचाव दल और परिवहन सुविधा से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान का दायरा बढ़ाकर महिलाओं को नौकरियों और गैर-पारंपरिक क्षेत्रों (जैसे EV मैन्युफैक्चरिंग) में प्रोत्साहित करने की बात भी कही गई है।
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स्वायत्त निकाय: बजट और रिक्तियों पर प्रहार
समिति ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को दिए गए 36 करोड़ रुपये के बजट को ‘अत्यंत अपर्याप्त’ बताया है। शीर्ष निकाय होने के नाते इसे वित्तीय रूप से मजबूत करने की जरूरत है। इसी तरह, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) में 35% से 55% तक पदों के रिक्त होने पर समिति ने कड़ी नाराजगी जताई है। समिति ने सिफारिश की है कि इन महत्वपूर्ण संस्थाओं को प्रतिनियुक्ति या संविदा के भरोसे छोड़ने के बजाय स्थायी और नियमित भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए ताकि जवाबदेही और संस्थागत स्मृति बनी रहे।
देखभाल अर्थव्यवस्था और छात्रावास योजना
रिपोर्ट में कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास के महत्व पर जोर देते हुए ‘एक जिला एक छात्रावास’ योजना के विस्तार की सिफारिश की गई है। समिति ने सुझाव दिया है कि छात्रावासों का निर्माण औद्योगिक पार्कों, अस्पतालों और डिजिटल हब के पास होना चाहिए ताकि शिक्षा से रोजगार के बीच का अंतर कम हो सके। इसके अलावा, आंगनवाड़ी सह-क्रेच (पालना) केंद्रों के लक्ष्य को तेजी से पूरा करने की बात कही गई है, विशेषकर उन राज्यों में जहां वर्तमान में इनकी संख्या शून्य है। समिति ने सरकार से यह भी कहा है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘देखभाल अर्थव्यवस्था’ (Care Economy) के प्रमुख स्तंभ के रूप में विकसित किया जाए।
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