रायपुर, 4 जुलाई। छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन-2026 के दौरान संभावित कम बारिश (अल्प वर्षा) की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं। मुख्यमंत्री ने अपने निवास कार्यालय में कृषि विभाग और नवनिर्धारित ‘विकसित भारत-वीबी-जी राम जी योजना’ की तैयारियों की एक हाई-स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ लफ्जों में कहा कि राज्य के किसानों का हित हमारी सरकार के लिए सबसे ऊपर है और किसी भी हाल में उन्हें खाद, बीज या तकनीकी मदद की कमी नहीं होने दी जाएगी।

केंद्रीय मंत्री नड्डा के सहयोग से छत्तीसगढ़ को मिला अतिरिक्त DAP

बैठक में मुख्यमंत्री ने एक बड़ी खुशखबरी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने हाल ही में केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा से छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए अतिरिक्त खाद की मांग की थी। इस पहल का बेहद सकारात्मक असर हुआ है और छत्तीसगढ़ को 46 हजार टन से अधिक अतिरिक्त डीएपी (DAP) की आपूर्ति मिल चुकी है, जो सामान्य से काफी ज़्यादा है। इससे किसानों को सही समय पर खाद मिलेगी और खेती-किसानी में कोई रुकावट नहीं आएगी।

‘मोर गांव मोर पानी’ से थमेगा जल संकट, कालाबाजारी पर कड़ा एक्शन

कम बारिश की स्थिति से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कई कड़े और महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं:

  • जल संरक्षण का महाअभियान: पानी को सहेजने के लिए ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान को और तेज किया जाएगा, जिसके तहत खेत-तालाब और भूजल संवर्धन (Groundwater Recharge) के काम युद्ध स्तर पर होंगे।

  • वैज्ञानिक खेती पर जोर: किसानों को कम समय में पकने वाली धान की किस्मों, कतार पद्धति और नमी सहेजने की आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक किया जाएगा। कम पानी वाले ऊंचे इलाकों में दलहन-तिलहन (दाल और तेल वाली फसलें) का रकबा बढ़ाया जाएगा।

  • दलालों पर नकेल: नकली बीज, अमानक खाद बेचने वालों और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ मुख्यमंत्री ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

अब 100 की जगह मिलेगा 125 दिन का रोजगार, ₹300 दिहाड़ी

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने के लिए राज्य में 1 जुलाई 2026 से लागू हुई ‘वीबी-जी राम जी योजना’ को लेकर भी बड़ा फैसला हुआ है। अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार दिया जाएगा, और मजदूरी दर 300 रुपये प्रतिदिन तय की गई है। इस योजना के तहत गांवों में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने वाले कामों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि ग्रामीणों की जेब में पैसा भी आए और राज्य की जल सुरक्षा भी मजबूत हो।

बिजली गिरने की आपदा से बचाएंगे मोबाइल ऐप्स

बैठक में मुख्यमंत्री ने किसानों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने मौसम विभाग द्वारा विकसित ‘सचेत’, ‘दामिनी’ और ‘मेघदूत’ जैसे मोबाइल ऐप्स का जमीनी स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा, ताकि आकाशीय बिजली और मौसम की सटीक जानकारी किसानों को समय पर मिल सके।

इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित मौसम और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के तमाम बड़े वैज्ञानिक और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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