नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने नई ‘विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन-ग्रामीण’ (VB-GRAM-G) योजना के तहत मजदूरों के हक में कई अहम नियम स्पष्ट किए हैं। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने लोकसभा में जानकारी दी कि मजदूरों को मिलने वाली दिहाड़ी और उनके भुगतान के नियमों को अब और सख्त और सुरक्षित बनाया गया है।
छत्तीसगढ़ में महंगा जाम: 1 अप्रैल से बदल जाएंगे देसी-विदेशी और बीयर के दाम!
मनरेगा से कम नहीं मिलेगा पैसा
सरकार ने साफ कर दिया है कि इस नई योजना के तहत मिलने वाली मजदूरी दर किसी भी हाल में मनरेगा (MGNREGA) की मौजूदा दरों से कम नहीं होगी। जब तक नई मजदूरी दरें तय नहीं हो जातीं, तब तक मनरेगा की दरें ही लागू रहेंगी। इसका सीधा मतलब यह है कि मजदूरों को मिलने वाली न्यूनतम दिहाड़ी पूरी तरह सुरक्षित है।
जशपुर में गूँजेगा ‘इंडिया इन स्पेस’ का नारा: गगनयात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला कल साझा करेंगे अंतरिक्ष के अनुभव
15 दिन के भीतर पैसा मिलना अनिवार्य
मजदूरों की सबसे बड़ी चिंता समय पर भुगतान की होती है। इसे दूर करने के लिए कानून में सख्त प्रावधान किए गए हैं: काम पूरा होने के बाद साप्ताहिक आधार पर या अधिकतम 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान करना जरूरी होगा।अगर मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर पैसे नहीं मिलते हैं, तो मजदूरों को देरी के बदले मुआवजे का भुगतान भी किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण भारत में रोजगार पाने वाले किसी भी व्यक्ति के हक का पैसा न रुके। यह कदम न केवल मजदूरों की आर्थिक स्थिति सुधारेगा बल्कि भुगतान प्रणाली में भी पारदर्शिता लाएगा।
बड़ी खबर: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अब होगी ‘मुफ्त’, केंद्र सरकार और फिजिक्स वाला (PW) के बीच हुआ बड़ा समझौता

